Pawan Khera Statement : मध्य प्रदेश के इंदौर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर तीखी टिप्पणी की। पत्रकार वार्ता में उन्होंने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े विवाद और हालिया मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। खेड़ा ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में आम नागरिक और प्रभावशाली लोगों के मामलों को एक समान तरीके से नहीं देखा जा रहा है।
आम नागरिक और बड़े नेताओं को लेकर उठाया सवाल
पवन खेड़ा ने अपने बयान में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़े एक मामले का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि बड़े नेताओं से संबंधित मतदाता सूची की समस्या का समाधान अगर तेजी से हो सकता है, तो आम नागरिकों के मामलों में ऐसा क्यों नहीं होता। उन्होंने सब्जी बेचने वाले एक सामान्य व्यक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव आयोग से नोटिस मिलने के बाद क्या उसकी शिकायत भी उतनी ही जल्दी सुनी जाएगी। कांग्रेस नेता ने इसी आधार पर व्यवस्था में समानता को लेकर सवाल उठाया।
वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता पर कांग्रेस का दावा
खेड़ा ने मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले वोटर लिस्ट को लेकर लोगों के बीच भरोसा और एक निश्चित प्रक्रिया की धारणा थी, लेकिन SIR से जुड़े विवादों के कारण उस पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि हालिया मीडिया रिपोर्टों से चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी सवाल सामने आए हैं।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का किया जिक्र
पवन खेड़ा ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कथित आपत्तियों का भी उल्लेख किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों के दौरान कई फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता डेटाबेस से जुड़े विषय शामिल थे।
ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग
कांग्रेस नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। खेड़ा ने उनकी साख पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से पहले उठाए गए सवालों का हवाला देते हुए ज्ञानेश कुमार से पद छोड़ने की मांग की और कहा कि मौजूदा विवाद में उन्हें अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।
सत्ता और जनसमर्थन को लेकर भी बयान
पवन खेड़ा ने अपने बयान में देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सत्ता में बैठे लोगों के प्रति जनता का समर्थन कम हो रहा है। हालांकि, यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आकलन है और इसे स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को व्यापक राजनीतिक जवाबदेही के मुद्दे से जोड़ते हुए अपनी पार्टी का पक्ष रखा।
आडवाणी को नोटिस का भी उठाया मुद्दा
खेड़ा ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का जिक्र करते हुए भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि पहले आडवाणी को मार्गदर्शक मंडल में भेजा गया और अब उन्हें नोटिस दिए जाने की चर्चा सामने आ रही है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने राजनीतिक दलों और संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर अपना विरोध दर्ज कराया।
चुनाव आयोग ने अंतिम फैसलों को बताया सर्वसम्मत
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट पर कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार, अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि आंतरिक टिप्पणियों और सुझावों को अंतिम संस्थागत निर्णय के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
SIR विवाद से बढ़ी राजनीतिक बहस
SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। कांग्रेस मतदाता सूची की प्रक्रिया, निर्णय लेने के तरीके और आयोग की जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रही है। वहीं निर्वाचन आयोग अपने फैसलों को वैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया और सर्वसम्मत बता रहा है। ऐसे में SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक तथा कानूनी बहस जारी रहने की संभावना है।
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