Maharashtra Drought 2026 : महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के किसानों और ग्रामीण आबादी को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित करने की घोषणा की है। इन क्षेत्रों में ट्रिगर-1 लागू होने के बाद सूखा घोषित किया गया है। सरकार के इस निर्णय के बाद महाराष्ट्र के करीब 75 प्रतिशत तालुके सूखा प्रभावित क्षेत्र के दायरे में आ गए हैं।
किसानों के लिए राहत उपायों का ऐलान
सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए सरकार ने कई राहत उपायों की घोषणा की है। इसके तहत जमीन के राजस्व में छूट देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही फसल ऋण के पुनर्गठन और खेती से जुड़े कर्ज की वसूली पर रोक लगाने की व्यवस्था की जाएगी। इन कदमों का उद्देश्य सूखे की स्थिति से प्रभावित किसानों पर तत्काल आर्थिक दबाव कम करना है।
कृषि पंपों के बिजली बिल में मिलेगी राहत
सरकार ने कृषि पंपों के बिजली बिल को लेकर भी राहत का ऐलान किया है। 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों का बिजली बिल पहले ही माफ किया जा चुका है। अब इससे अधिक क्षमता वाले कृषि पंपों के लिए भी बिजली बिल में छूट देने की बात कही गई है। सूखा घोषित गांवों में किसानों के कृषि पंपों का बिजली कनेक्शन नहीं काटने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विद्यार्थियों और रोजगार के लिए भी राहत
सूखा प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क में माफी दी जाएगी। इसके अलावा रोजगार गारंटी योजना के नियमों में ढील देकर ज्यादा से ज्यादा रोजगार के काम शुरू किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ लोगों की आय के साधनों को बनाए रखना है।
पीने के पानी और पशुओं के लिए विशेष व्यवस्था
जिन इलाकों में पानी की जरूरत होगी, वहां पीने के पानी के टैंकर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। खेती पर निर्भर किसानों और खेत मजदूरों को अनाज उपलब्ध कराने की योजना भी लागू की जाएगी। साथ ही पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की जाएगी। पेयजल और पशुओं के पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए पहले जारी आदेशों के अनुसार नियोजन जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
जल संरक्षण के काम होंगे तेज
सूखा प्रभावित इलाकों में बड़े स्तर पर जल संरक्षण से जुड़े काम शुरू किए जाएंगे। सरकार की ओर से जिलाधिकारियों को पंचनामा की कार्रवाई तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज करने के लिए फोटो और जीपीएस लोकेशन का रिकॉर्ड तैयार करने को कहा गया है। इससे प्रभावित क्षेत्रों और फसल नुकसान का दस्तावेजीकरण किया जा सकेगा।
सूखा घोषित करने के पीछे क्या कारण होते हैं?
भारत में किसी क्षेत्र को सूखा प्रभावित घोषित करने का निर्णय सामान्यतः राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाता है। सूखा घोषित करने के प्रमुख आधारों में बारिश की कमी, फसलों को नुकसान, पानी का संकट और आम लोगों के जीवन पर पड़ने वाला गंभीर प्रभाव शामिल हो सकते हैं। लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं होने पर कृषि गतिविधियां प्रभावित होती हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है।
सूखे का सामाजिक और आर्थिक असर
सूखे की स्थिति केवल खेती तक सीमित नहीं रहती। पानी और रोजगार की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों का दूसरे स्थानों की ओर पलायन बढ़ सकता है। खाद्य उपलब्धता और पशुपालन पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि सूखा घोषित होने के बाद सरकारें राहत, रोजगार, पानी, चारा और कृषि सहायता से जुड़े उपाय लागू करती हैं।
फडणवीस पहले भी रहे हैं सुर्खियों में
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इससे पहले महाराष्ट्र में मराठी भाषा सीखने को लेकर उठे विवाद के दौरान भी चर्चा में रहे थे। उस समय उन्होंने कहा था कि भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। अब 265 तालुकों में सूखा घोषित करने और राहत उपायों के ऐलान के बाद महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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