Asian Games 2026 : एशियाई खेलों में भारतीय टेनिस टीम का अभियान इस बार बिना पदक के समाप्त हो गया। पुरुष एकल के क्वार्टर फाइनल में सुमित नागल को चीन के यिबिंग वू के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। नागल की हार के साथ ही भारतीय टेनिस दल की पदक की उम्मीदें भी खत्म हो गईं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 1986 के बाद यह पहली बार है जब भारत एशियाई खेलों से टेनिस में कोई पदक जीते बिना लौटेगा।
यिबिंग वू ने सीधे सेटों में हराया
भारतीय पुरुष एकल में चुनौती संभाल रहे सुमित नागल को चीन के यिबिंग वू ने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में 6-4, 6-4 से मात दी। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला करीब एक घंटे 38 मिनट तक चला। नागल ने मैच में संघर्ष किया, लेकिन वह चीन के खिलाड़ी के खिलाफ निर्णायक बढ़त हासिल नहीं कर सके। इस हार के साथ भारतीय टेनिस अभियान का आखिरी मुकाबला भी समाप्त हो गया।
युगल मुकाबलों में पहले ही टूट चुकी थीं उम्मीदें
सुमित नागल पर भारतीय टीम की उम्मीदें इसलिए भी टिकी थीं क्योंकि पदक की दावेदार मानी जा रही युगल जोड़ियां एक दिन पहले ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई थीं। युकी भांबरी और एन श्रीराम बालाजी से भारत को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन पुरुष युगल और मिश्रित युगल में हार के बाद दोनों की चुनौती समाप्त हो गई। इसके बाद नागल भारतीय टेनिस की आखिरी उम्मीद बने हुए थे।
1990 के बाद हर एशियाई खेल में जीते पदक
भारतीय टेनिस का एशियाई खेलों में लंबा पदक इतिहास रहा है। 1990 के बाद से भारत ने हर एशियाई खेल में टेनिस में कम से कम एक पदक जीता था। इस बार भारतीय दल से कम से कम तीन पदक की उम्मीदें जताई जा रही थीं। हालांकि, एकल और युगल मुकाबलों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होने के कारण यह सिलसिला टूट गया।
2018 में प्रग्नेश और अंकिता ने जीते थे पदक
एशियाई खेलों के एकल वर्ग में भारत को आखिरी बार 2018 में पदक मिला था। जकार्ता में आयोजित एशियाई खेलों में प्रग्नेश गुणेश्वरन और अंकिता रैना ने अपने-अपने एकल वर्ग में कांस्य पदक जीते थे। इसके बाद 2023 के हांगझोउ एशियाई खेलों में भारत को टेनिस के एकल वर्ग में कोई पदक नहीं मिला था। इस बार भी एकल में भारतीय चुनौती पदक तक नहीं पहुंच सकी।
भारत का युगल वर्ग में रहा है शानदार रिकॉर्ड
भारतीय टेनिस खिलाड़ियों ने एशियाई खेलों में युगल वर्ग में भी शानदार प्रदर्शन किया है। 2018 में रोहन बोपन्ना और दिविज शरण की जोड़ी ने पुरुष युगल में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद 2023 में रोहन बोपन्ना और रुतुजा भोसले ने मिश्रित युगल में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया था। इस पृष्ठभूमि में मौजूदा प्रदर्शन भारतीय टेनिस के लिए महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।
अगली पीढ़ी तैयार करने की चुनौती
सुमित नागल अभी 29 वर्ष के हैं और 2030 में होने वाले दोहा एशियाई खेलों के समय उनकी उम्र 33 वर्ष होगी। ऐसे में भारतीय टेनिस को आने वाले वर्षों में नई प्रतिभाओं को तैयार करने पर ध्यान देना होगा। राष्ट्रीय टीम के सामने अनुभवी खिलाड़ियों के साथ नई पीढ़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने की चुनौती रहेगी।
कोच ने परिणाम की जिम्मेदारी स्वीकार की
भारतीय कोच आशुतोष सिंह ने टीम के प्रदर्शन को लेकर कहा कि टीम बेहतर परिणाम चाहती थी और खिलाड़ियों के पास क्षमता तथा अनुभव भी था। उन्होंने कहा कि टीम एक इकाई के रूप में परिणाम की जिम्मेदारी लेती है और बहाने बनाने का कोई फायदा नहीं है। हालांकि, उनके मुताबिक प्रदर्शन का आकलन केवल स्कोर के आधार पर नहीं बल्कि परिस्थितियों, कार्यक्रम, तैयारी और विरोधी टीम की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर भी किया जाना चाहिए।
भारत ने एशियाई खेलों में जीते हैं 63 पदक
एशियाई खेलों में भारत का कुल प्रदर्शन अभी भी मजबूत बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत ने अब तक टेनिस समेत विभिन्न खेलों में 63 पदक जीते हैं, जिनमें 10 स्वर्ण, 22 रजत और 21 कांस्य पदक शामिल हैं। टेनिस अभियान खत्म होने के बाद भी भारतीय दल की पदक उम्मीदें पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। कुश्ती, क्रिकेट, मुक्केबाजी और हॉकी जैसे खेलों में भारतीय खिलाड़ियों से पदक की उम्मीदें कायम हैं।
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