Omar Abdullah : जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सत्र के दौरान मंगलवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के एक बयान ने सदन का माहौल हल्का-फुल्का कर दिया। पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने से जुड़े विधेयक पर चर्चा और उसके पारित होने के बाद उमर अब्दुल्ला ने ऐसा टिप्पणी की, जिसे सुनकर विधानसभा में मौजूद सदस्य ठहाके लगाने लगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इस विधेयक के पारित होने के बाद उनके लिए घर जाना आसान हो जाएगा, क्योंकि उनके घर में भी एक पूर्व विधायक मौजूद हैं।
फारूक अब्दुल्ला भी बेटे की बात सुनकर हंस पड़े
उमर अब्दुल्ला जिस पूर्व विधायक का जिक्र कर रहे थे, वह कोई और नहीं बल्कि उनके पिता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला हैं। जिस समय विधानसभा में यह विधेयक पारित हुआ, उस दौरान फारूक अब्दुल्ला सदन की वीआईपी गैलरी में मौजूद थे और पूरी कार्यवाही देख रहे थे। बेटे की टिप्पणी सुनते ही फारूक अब्दुल्ला भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। उनके चेहरे पर मुस्कान दिखाई दी और सदन का माहौल कुछ देर के लिए खुशनुमा हो गया।
बीजेपी विधायकों ने भी नहीं जताया पेंशन बढ़ोतरी पर विरोध
खास बात यह रही कि पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने से जुड़े इस प्रस्ताव पर बीजेपी विधायकों की ओर से विरोध दर्ज नहीं कराया गया। उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी के बाद बीजेपी के सदस्य भी हंसते नजर आए। राजनीतिक मतभेदों के बीच सदन में कुछ समय के लिए ऐसा माहौल बना, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य एक साथ मुस्कुराते दिखाई दिए।
विधानसभा में सुबह से ही बीजेपी और NC आमने-सामने
हालांकि, इससे पहले विधानसभा की कार्यवाही की शुरुआत काफी हंगामेदार रही थी। सदन की बैठक शुरू होते ही बीजेपी विधायकों ने सोमवार को ध्वनिमत से पारित राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव का विरोध करना शुरू कर दिया। बीजेपी सदस्यों ने खड़े होकर नारेबाजी की और विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर के खिलाफ भी नारे लगाए। बीजेपी विधायकों ने अध्यक्ष से आसन छोड़ने की मांग भी की।
NC नेताओं ने बीजेपी के नारों का दिया जवाब
बीजेपी की नारेबाजी के जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य भी खड़े हो गए। दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी से सदन का माहौल काफी गरम हो गया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्यों ने बीजेपी नेताओं के खिलाफ नारे लगाए और उन्हें ‘वोट चोर’ कहा। इस दौरान विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
दस दिवसीय सत्र के बाद विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का दस दिवसीय सत्र बुधवार को समाप्त हो गया। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर ने करीब सात घंटे चली बैठक के बाद सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। अध्यक्ष ने सत्र के दौरान हुए कामकाज का ब्योरा भी सदन के सामने रखा। उन्होंने बताया कि विधानसभा की सात बैठकों में 25 घंटे से अधिक समय तक कार्यवाही चली।
646 प्रश्नों में से 625 प्रश्न हुए सूचीबद्ध
अध्यक्ष राठेर के मुताबिक, विधानसभा को कुल 646 प्रश्न प्राप्त हुए थे। इनमें 328 तारांकित प्रश्न शामिल थे। कुल 625 प्रश्न सूचीबद्ध किए गए, जबकि एक प्रश्न वापस ले लिया गया और 25 प्रश्नों को अनुमति नहीं मिली। इसके अलावा सदन को 79 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी प्राप्त हुए थे। इनमें से 23 प्रस्ताव अस्वीकार कर दिए गए, जबकि 56 को अनुमति प्रदान की गई।
आठ सरकारी विधेयक पेश हुए, छह पारित
अध्यक्ष ने बताया कि सत्र के दौरान सरकार की ओर से आठ विधेयक पेश किए गए। इनमें से छह विधेयक सदन से पारित हो गए, जबकि दो विधेयक वापस ले लिए गए। इसके साथ ही दो सरकारी संकल्प भी सदन में पेश किए गए और दोनों को स्वीकार कर लिया गया। अध्यक्ष ने सदस्यों के सहयोग के लिए उनका आभार जताया।
निजी विधेयकों और संकल्पों का भी दिया गया ब्योरा
राठेर ने बताया कि कुल 70 गैर-सरकारी संकल्प प्राप्त हुए थे। इनमें से सात को सूचीबद्ध किया गया, जबकि एक संकल्प को सदन में चर्चा के लिए लिया गया, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। इसके अलावा 49 निजी विधेयक पहले से लंबित थे और 23 नए निजी विधेयक पेश किए गए। इनमें से एक विधेयक को अनुमति नहीं दी गई, जबकि एक विधेयक को सदन ने चर्चा के लिए स्वीकार किया। इस तरह हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच जम्मू-कश्मीर विधानसभा का सत्र कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के साथ समाप्त हुआ।
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