Cockpit Door Security : फ्लाईदुबई की तेल अवीव जा रही एक उड़ान में हुई चौंकाने वाली घटना ने एक बार फिर विमान के कॉकपिट सुरक्षा सिस्टम को चर्चा में ला दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, कैप्टन स्मित मच्छार को उनके को-पायलट ने चाकू मारकर घायल कर दिया था। खून से लथपथ होने के बावजूद उन्होंने अपनी बची हुई ताकत का इस्तेमाल करते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिससे यात्रियों और क्रू को अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू करने में मदद मिली।
घायल कप्तान ने खोला कॉकपिट का दरवाजा
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रवक्ता के मुताबिक, हमले के बाद कैप्टन मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया था। इसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने फ्लाइट डेक में प्रवेश किया और हमलावर पर नियंत्रण हासिल किया। विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के एक ऑफ-ड्यूटी पायलट ने भी विमान को संभालने में सहायता की। इसके बाद विमान की सऊदी अरब में आपात लैंडिंग कराई गई।
9/11 से पहले कॉकपिट दरवाजे इतने मजबूत नहीं थे
आज विमानों में कॉकपिट का दरवाजा सुरक्षा व्यवस्था का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन 11 सितंबर 2001 से पहले स्थिति अलग थी। उस दौर में फ्लाइट डेक के दरवाजे मुख्य रूप से प्राइवेसी और यात्रियों की गतिविधियों से पायलटों को अलग रखने के उद्देश्य से बनाए जाते थे। उन्हें किसी हमलावर को जबरन अंदर घुसने से रोकने वाले मजबूत सुरक्षा अवरोध के रूप में डिजाइन नहीं किया गया था।
हाईजैकिंग से निपटने की रणनीति भी अलग थी
9/11 से पहले विमान अपहरण की घटनाओं को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की सोच भी आज से अलग थी। कई दशकों तक प्राथमिक रणनीति हाईजैकर्स के साथ सहयोग करने, विमान को सुरक्षित स्थान पर उतारने और उसके बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों को स्थिति संभालने देने की रही। यह सोच मुख्य रूप से 1960 और 1970 के दशक की हाईजैकिंग घटनाओं से विकसित हुई थी।
9/11 ने बदल दी विमान सुरक्षा की पूरी सोच
11 सितंबर 2001 को चार कमर्शियल विमानों के अपहरण ने इस पुरानी रणनीति की गंभीर सीमाएं उजागर कर दीं। 9/11 कमीशन के अनुसार, अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 11 के कॉकपिट पर सुबह करीब 8:14 बजे के बाद कब्जा किया गया। बाद में विमान को न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नॉर्थ टावर से टकरा दिया गया। यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 175 भी कुछ देर बाद साउथ टावर से टकराई।
कॉकपिट को सुरक्षित क्षेत्र बनाने पर जोर
इन हमलों के बाद विमान सुरक्षा का लक्ष्य केवल हाईजैकिंग को नियंत्रित करना नहीं रहा, बल्कि अनधिकृत व्यक्ति को फ्लाइट डेक तक पहुंचने से रोकना बन गया। अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी FAA ने एयरलाइंस को कॉकपिट दरवाजों को मजबूत करने के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा। इसके बाद स्थायी सुरक्षा मानकों को भी लागू किया गया।
मजबूत दरवाजों के लिए लागू हुए नए नियम
जनवरी 2002 में FAA ने ऐसे नियम लागू किए जिनके तहत हजारों विमानों में मजबूत कॉकपिट दरवाजे लगाना जरूरी हुआ। इन दरवाजों को जबरन प्रवेश के प्रयासों का सामना करने में सक्षम बनाया गया। साथ ही उन्हें गोलीबारी और उससे उत्पन्न टुकड़ों से सुरक्षा देने के लिए डिजाइन किया गया। दरवाजे और उनके फ्रेम को विमान की संरचना से मजबूती से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
फ्लाइट डेक तक पहुंचने की प्रक्रिया हुई सख्त
नए सुरक्षा नियमों के बाद कॉकपिट में प्रवेश की प्रक्रिया भी पूरी तरह बदल गई। फ्लाइट के दौरान कॉकपिट का दरवाजा बंद रखना जरूरी किया गया और केवल अधिकृत लोगों को ही फ्लाइट डेक में प्रवेश की अनुमति दी गई। गैर-ड्यूटी क्रू के लिए कॉकपिट दरवाजे की चाबी रखने पर भी प्रतिबंध जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। इस तरह कॉकपिट एक सामान्य कार्यस्थल से अत्यधिक सुरक्षित क्षेत्र में बदल गया।
सुरक्षा और संचालन के बीच संतुलन बड़ी चुनौती
हालांकि, कॉकपिट को पूरी तरह सुरक्षित रखने के साथ एक व्यावहारिक चुनौती भी बनी रही। पायलटों को कभी-कभी कॉकपिट से बाहर निकलने की जरूरत होती है और केबिन क्रू को अंदर जाना पड़ता है। पायलट के शौचालय जाने, क्रू बदलने या अन्य परिचालन परिस्थितियों में भी दरवाजा खोलना जरूरी हो सकता है। इसलिए आधुनिक कॉकपिट सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल दरवाजा मजबूत करना नहीं, बल्कि प्रवेश और निकास को नियंत्रित तरीके से सुरक्षित रखना भी है।
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