Rahul Gandhi Balaghat : मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला लगातार चर्चा में है। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को बालाघाट के बिरसा ब्लॉक स्थित जगला गांव पहुंचे। उन्होंने बीमारी और कुपोषण से बच्चों को खोने वाले बैगा आदिवासी परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। रिपोर्टों के अनुसार राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों के साथ करीब एक घंटे तक बातचीत की।
बच्चों की मौत को लेकर सामने आए अलग-अलग आंकड़े
बालाघाट के बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत को लेकर सरकारी आंकड़ों और कांग्रेस के दावों में अंतर सामने आया है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक सरकारी रिकॉर्ड में बीमारी से संबंधित 32 बच्चों की मौत का उल्लेख है, जबकि कांग्रेस की ओर से इससे अधिक, 43 बच्चों की मौत का दावा किया गया है। अधिकारियों की जांच में भी मौतों के पीछे एक ही बीमारी को जिम्मेदार नहीं बताया गया है।
मलेरिया, कुपोषण और दूसरी बीमारियों का जिक्र
प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों की जांच के दौरान मलेरिया, खसरा, कुपोषण, एनीमिया, निमोनिया और डिहाइड्रेशन जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख सामने आया है। ऐसे में बच्चों की मौतों को केवल मलेरिया से जोड़ना पूरी तरह उचित नहीं होगा। अधिकारियों की जांच और उपलब्ध रिपोर्टों में अलग-अलग स्वास्थ्य कारणों का जिक्र किया गया है। इसी वजह से पूरे मामले की जांच और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
राहुल गांधी ने सरकार पर लगाया सहायता नहीं देने का आरोप
आदिवासी परिवारों से बातचीत के बाद राहुल गांधी ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बालाघाट में कई बच्चों की मौत कुपोषण और अन्य बीमारियों के कारण हुई है, लेकिन प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिल रही है। राहुल गांधी ने दावा किया कि कई परिवारों ने अपने बच्चों को खो दिया, लेकिन सभी प्रभावित परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। यह उनका राजनीतिक आरोप है, जिसकी सरकारी पक्ष से अलग व्याख्या हो सकती है।
जमीन और वन अधिकार के मुद्दे भी उठाए
राहुल गांधी ने आदिवासी परिवारों की समस्याओं में जमीन और वन अधिकार अधिनियम से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रोजगार और मनरेगा से जुड़े मुद्दे भी ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनके मुताबिक प्रभावित समुदायों को केवल आर्थिक सहायता देने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और उनके कानूनी अधिकारों तक पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।
स्कूल और अस्पताल की सुविधाओं पर जोर
राहुल गांधी ने बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पूरी तरह पहुंचना चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोगों को किसी एक योजना का लाभ मिलने के कारण दूसरी योजना से वंचित न होना पड़े।
लाड़ली बहना योजना को लेकर भी राहुल का बयान
राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ परिवारों को एक सरकारी योजना का लाभ मिलने के बाद दूसरी योजना से मिलने वाली सहायता प्रभावित हो जाती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं तो पात्र परिवारों को नियमों के अनुसार सभी उपलब्ध लाभ मिलना चाहिए। इस मुद्दे पर राहुल गांधी ने सरकार से योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करने की मांग की।
‘सरकार में आए तो मदद करेंगे’, राहुल गांधी का दावा
राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों से कहा कि कांग्रेस उनके मुद्दों को उठाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में आने पर आदिवासी समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए काम किया जाएगा। उन्होंने आदिवासी समुदाय के लिए सम्मानजनक संबोधन और उनके अधिकारों की बात भी रखी। उनके बयान में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, वन अधिकार और सरकारी योजनाओं की पहुंच प्रमुख मुद्दे रहे।
बालाघाट मामले पर जारी है राजनीतिक बहस
बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला अब स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की पहुंच के साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। कांग्रेस सरकार से जवाबदेही की मांग कर रही है, जबकि राज्य सरकार की ओर से राहुल गांधी के दौरे और कांग्रेस के आरोपों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। इस बीच प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की मौत के कारणों और सरकारी सहायता को लेकर आधिकारिक जांच तथा स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
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