Parliament News : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति के चेयरपर्सन की नियुक्ति पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने नियुक्ति को वापस लेने और समिति की अध्यक्षता तृणमूल कांग्रेस की ओर से नामित सदस्य को सौंपने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने 3 अक्टूबर 2026 के लोकसभा बुलेटिन-पार्ट II संख्या 6185 का भी उल्लेख किया है।
अयोग्यता याचिका लंबित होने का लगाया आरोप
अभिषेक बनर्जी ने दावा किया है कि समिति का चेयरपर्सन ऐसे सदस्य को बनाया गया है, जिनके खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से जुड़ी याचिका लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अभी लंबित है। उनका कहना है कि जब किसी सदस्य की राजनीतिक संबद्धता और अयोग्यता का मामला विचाराधीन हो, तब उन्हें महत्वपूर्ण संसदीय समिति की अध्यक्षता देना कई सवाल खड़े करता है।
टीएमसी से छिनी दो महत्वपूर्ण संसदीय समितियां
दरअसल, संसदीय समितियों के हालिया पुनर्गठन के बाद तृणमूल कांग्रेस को दो महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता गंवानी पड़ी है। शनिवार को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विभिन्न विभाग-संबंधी संसदीय स्थायी समितियों का पुनर्गठन किया। इस बदलाव के तहत बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी को वाणिज्य संबंधी संसदीय समिति का नया चेयरपर्सन बनाया गया।
डोला सेन की जगह सुधांशु त्रिवेदी को मिली जिम्मेदारी
वाणिज्य संबंधी संसदीय समिति की अध्यक्षता पहले टीएमसी की डोला सेन के पास थी। पुनर्गठन के बाद सुधांशु त्रिवेदी ने उनकी जगह ली है। इसी तरह रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय समिति की कमान अब टीएमसी के बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार को दी गई है। उन्होंने टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है।
23 सितंबर के पत्र का भी अभिषेक ने दिया हवाला
अभिषेक बनर्जी के मुताबिक, उन्होंने 23 सितंबर 2026 को भेजे गए अपने पत्रों में लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया था कि जिन 20 सदस्यों के खिलाफ अयोग्यता संबंधी याचिकाएं लंबित हैं, उन्हें इन याचिकाओं पर फैसला होने तक विभाग-संबंधी संसदीय स्थायी समितियों में नियुक्ति के लिए विचार से बाहर रखा जाए। उन्होंने समिति की अध्यक्षता तृणमूल कांग्रेस के पास बनाए रखने का अनुरोध भी किया था।
टीएमसी के नामांकन को नजरअंदाज करने का आरोप
बनर्जी ने कहा कि पार्टी ने मौजूदा चेयरपर्सन को पद पर बनाए रखने के लिए बाकायदा अपना नामांकन भेजा था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद रसायन एवं उर्वरक संबंधी समिति में नई नियुक्ति करते समय टीएमसी की आपत्ति और पार्टी द्वारा भेजे गए नामांकन, दोनों को नजरअंदाज कर दिया गया। इसी को लेकर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा है।
डिजिटल संसद वेबसाइट पर सदस्यता को लेकर सवाल
अभिषेक बनर्जी ने पत्र में डिजिटल संसद की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वेबसाइट पर फिलहाल लोकसभा में एआईटीसी के 28 सदस्य दिखाए जा रहे हैं। वहीं, समिति की चेयरपर्सन नियुक्त सदस्य ने विलय के आधार पर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) से अपनी संबद्धता का दावा किया है।
विलय और पार्टी संबद्धता पर उठाया बड़ा सवाल
टीएमसी नेता के अनुसार, संबंधित सदस्य की पार्टी संबद्धता का मुद्दा ही लंबित अयोग्यता कार्यवाही में विवाद का विषय है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय समिति किस राजनीतिक दल के खाते में आवंटित की गई है। उनका कहना है कि इस स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि समिति के गठन को लेकर कोई संवैधानिक या संसदीय भ्रम न रहे।
अध्यक्ष पद किस आधार पर आवंटित हुआ?
अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से पूछा कि यदि समिति की अध्यक्षता एआईटीसी के हिस्से में आवंटित की गई है, तो पार्टी की स्पष्ट इच्छा के विरुद्ध उसके नामित सदस्य को क्यों बदला गया? वहीं, अगर यह पद एनसीपीआई को दिया गया है तो उसकी संबद्धता को किस आदेश के आधार पर मान्यता मिली और उसी आधार पर समिति की अध्यक्षता कैसे सौंपी गई?
नियुक्ति वापस लेने और लिखित जवाब की मांग
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि किसी सदस्य की पार्टी संबद्धता का मामला लंबित होने के बावजूद उन्हें संसदीय समिति का चेयरपर्सन बनाना संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने ओम बिरला से नियुक्ति वापस लेने और रसायन एवं उर्वरक समिति की अध्यक्षता एआईटीसी की ओर से विधिवत नामित सदस्य को सौंपने की मांग की है। साथ ही उन्होंने लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द निर्णय लेने और अपने पत्र में उठाए गए सभी सवालों पर लोकसभा अध्यक्ष से लिखित जवाब देने का अनुरोध किया है।
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