Pakistan at UN: संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति की बैठक में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद भारत ने पाकिस्तान को जवाब दिया। भारत ने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के आरोपों को खारिज किया और अपनी स्थिति स्पष्ट की। भारतीय पक्ष ने कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने के बजाय अपने देश में मौजूद राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए।
भाविका मंगलानंदन ने पाकिस्तान पर लगाए गंभीर आरोप
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने भारत की ओर से जवाब देते हुए पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में नागरिक सरकारों और सेना के बीच संबंधों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को मानवाधिकारों और लोकतंत्र के मुद्दे पर भारत को सलाह देने से पहले अपनी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
इमरान खान और राजनीतिक हालात का किया उल्लेख
भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का भी संदर्भ दिया। भारत की ओर से कहा गया कि पाकिस्तान में राजनीतिक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई और विपक्ष की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। भारतीय पक्ष ने इन उदाहरणों का इस्तेमाल पाकिस्तान के लोकतांत्रिक दावों पर सवाल उठाने के लिए किया। हालांकि, पाकिस्तान इन मुद्दों को लेकर अपना अलग पक्ष रखता रहा है।
जम्मू-कश्मीर को भारत ने बताया अभिन्न हिस्सा
भाविका मंगलानंदन ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत की पारंपरिक स्थिति दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों पर उसका रुख स्पष्ट है और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड में भी भारत और पाकिस्तान की कश्मीर मुद्दे पर अलग-अलग स्थितियां दर्ज हैं।
सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर निशाना
भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप भी दोहराया। भारतीय पक्ष के अनुसार, पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद और घुसपैठ के जरिए भारत को प्रभावित करने की कोशिश करता रहा है। भाविका मंगलानंदन ने कहा कि भारत को निशाना बनाने के बजाय पाकिस्तान को अपने देश के अंदर मौजूद सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
PoK को लेकर भारत ने उठाया मुद्दा
भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK का मुद्दा भी संयुक्त राष्ट्र में उठाया। भारतीय पक्ष ने कहा कि पाकिस्तान को भारतीय क्षेत्र पर अपने दावे करने के बजाय अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। भारत ने वहां नागरिक सुविधाओं, आर्थिक परेशानियों और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया और पाकिस्तान से अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान देने को कहा।
मीडिया और चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल
भाविका मंगलानंदन ने पाकिस्तान की मीडिया स्वतंत्रता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वहां राजनीतिक और संस्थागत व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल मौजूद हैं। भारत ने इसके विपरीत जम्मू-कश्मीर में 2024 में हुए विधानसभा चुनावों का उल्लेख किया और कहा कि बड़ी संख्या में लोगों ने मतदान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया।
भारत ने पाकिस्तान को घरेलू मुद्दों पर ध्यान देने को कहा
भारतीय पक्ष ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने के बजाय अपनी घरेलू चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। भारत ने विशेष रूप से आर्थिक संकट, महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक समस्याओं जैसे मुद्दों का हवाला दिया। हालांकि, इन मुद्दों और दोनों देशों के आरोप-प्रत्यारोप पर पाकिस्तान का अपना अलग दृष्टिकोण है।
UN में फिर सामने आई भारत-पाकिस्तान की पुरानी तनातनी
संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर को लेकर मतभेद एक बार फिर सामने आए। भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए आतंकवाद, लोकतंत्र और क्षेत्रीय दावों से जुड़े मुद्दे उठाए। वहीं पाकिस्तान लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दे के रूप में पेश करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों में दोनों पक्षों के ऐसे परस्पर विरोधी दावे लंबे समय से दर्ज होते रहे हैं।
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