US Iran war : अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरान को अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते के लिए अपनी परमाणु ईंधन संवर्धन क्षमता में पर्याप्त कमी करनी होगी। उनका कहना है कि केवल भविष्य में परमाणु कार्यक्रम सीमित करने का वादा पर्याप्त नहीं होगा। तेहरान को अपने रुख में ठोस बदलाव दिखाना होगा।

परमाणु हथियारों पर अमेरिका का सख्त रुख
वेंस ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करना चाहता, तो उसके पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम बनाने की बड़ी क्षमता रखने का कोई मजबूत कारण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर सिर्फ बयान नहीं, बल्कि वास्तविक कदम उठाने होंगे।
बातचीत में जेडी वेंस की अहम भूमिका
रॉयटर्स को दिए एक विशेष इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि वह युद्ध समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। विदेशों में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की लंबे समय से आलोचना करने वाले वेंस अब ईरान के साथ बातचीत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।
पहले भी टूट चुकी है शांति की कोशिश
वेंस के मुताबिक, जून में दोनों देशों के बीच अस्थायी शांति समझौते की कोशिश हुई थी, लेकिन यह ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। अब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने तथा तनाव कम करने के लिए नए प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी भी गंभीर हैं।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। दोनों देश युद्ध समाप्त करने के साथ होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने से जुड़े प्रस्तावों पर बातचीत कर रहे हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन रास्तों में शामिल है और यहां किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक बाजार को प्रभावित कर सकता है।
ईरान में फैसला कौन ले रहा, इस पर सवाल
अमेरिकी प्रशासन के सामने एक और बड़ी चुनौती ईरान के सत्ता ढांचे को लेकर बनी अनिश्चितता है। वेंस ने कहा कि अमेरिका ईरानी राष्ट्रपति मसूद पझवोक और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत कर रहा है, लेकिन वॉशिंगटन को यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि देश के भीतर अंतिम फैसले लेने की वास्तविक शक्ति किसके पास है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने दावे को नकारा
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने अमेरिका के इस आकलन को खारिज किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी अधिकारी अच्छी तरह जानते हैं कि ईरान में निर्णय लेने की प्रक्रिया कैसे काम करती है। बघई ने उल्टा अमेरिका पर अलग-अलग अधिकारियों के अलग-अलग बयान देने का आरोप लगाया।
युद्ध का खर्च बना राजनीतिक चुनौती
ईरान-अमेरिका युद्ध की आर्थिक कीमत भी अमेरिकी राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा बनती जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध पर अमेरिका को हर महीने करीब 3 अरब डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा ईंधन की बढ़ती कीमतें ट्रंप प्रशासन और रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ा रही हैं।
मिडटर्म चुनाव से पहले बढ़ा दबाव
नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले ईरान युद्ध ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती बन गया है। वेंस युद्ध को लेकर सरकार की रणनीति पर बढ़ती आलोचना को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका संदेश है कि मतदाता इस मुद्दे के आधार पर रिपब्लिकन पार्टी के समर्थन से पीछे न हटें।
समझौते के लिए ईरान को उठाने होंगे ठोस कदम
वेंस ने संकेत दिया कि अमेरिका बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है, लेकिन समझौते के लिए ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम में वास्तविक और प्रमाणित रियायत देनी होगी। उनका कहना है कि अमेरिका केवल आश्वासनों पर भरोसा नहीं करेगा। अब बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तेहरान अपने परमाणु संवर्धन को लेकर कितनी ठोस पहल करता है।
Read more : Flydubai FZ1073 : कैप्टन स्मित की बहादुरी पर इजरायली संगीतकार ने गाया शाहरुख का गाना, वीडियो वायरल