SIR : मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) और अन्य संबद्ध सेवाओं के 124 पूर्व अधिकारियों ने निर्वाचन आयोग के समर्थन में खुला पत्र जारी किया है। नागरिकों को संबोधित इस पत्र में पूर्व अधिकारियों ने चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया का समर्थन किया। उन्होंने बिना ठोस सबूत के चुनाव में धांधली के आरोप लगाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
चुनाव प्रक्रिया में बदलाव का दिया हवाला
पत्र में पूर्व अधिकारियों ने कहा कि भारत में चुनावों के दौरान मतदान केंद्रों पर कब्जा करने, मतपेटियों में फर्जी मतपत्र डालने और हिंसा जैसी घटनाओं का दौर काफी हद तक पीछे छूट चुका है। उनके मुताबिक, मौजूदा चुनाव व्यवस्था में सुरक्षा और निगरानी के कई स्तर मौजूद हैं, जिनका उद्देश्य मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना है। उन्होंने तर्क दिया कि चुनावी व्यवस्था को लेकर कोई भी गंभीर आरोप ठोस तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर लगाया जाना चाहिए।
EVM, स्ट्रांग रूम और VVPAT का किया उल्लेख
पूर्व अधिकारियों ने अपने पत्र में चुनाव प्रक्रिया के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों का भी जिक्र किया। इनमें मतदान केंद्रों पर उम्मीदवारों के मतदान एजेंटों की मौजूदगी, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को सील करना, मशीनों को स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखना और वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) के जरिए सत्यापन जैसे इंतजाम शामिल हैं। उनका कहना है कि ये व्यवस्थाएं चुनाव प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई हैं। हालांकि, चुनावी व्यवस्था पर उठने वाले सवालों का मूल्यांकन संबंधित तथ्यों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर किया जाना जरूरी है।
बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण पेश किया
पत्र में पूर्व अधिकारियों ने बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए चुनावी प्रक्रिया के पक्ष में अपना तर्क रखा। उनके अनुसार, उस चुनाव में किसी भी मतदान केंद्र पर दोबारा मतदान कराने की जरूरत नहीं पड़ी और 1951 के बाद सबसे अधिक मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने वालों से अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने की मांग की। पत्र में कहा गया कि किसी चुनाव में जीत मिलने पर व्यवस्था को सही और हार के बाद उसी व्यवस्था को धांधलीपूर्ण बताना उचित नहीं है।
भाजपा की चुनावी हार का भी किया जिक्र
पूर्व अधिकारियों ने अपने पत्र में यह भी कहा कि मौजूदा निर्वाचन आयोग के कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कई राज्यों के विधानसभा चुनाव हार चुकी है। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर सकी। पत्र के अनुसार, इन परिणामों को भी चुनावी प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। पूर्व अधिकारियों ने इस तर्क के माध्यम से चुनाव में धांधली के आरोपों पर सवाल उठाए हैं।
कई वरिष्ठ पूर्व अधिकारी पत्र में शामिल
इस खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल के साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी आर. डी. कपूर, समीरेंद्र चटर्जी, गोपाल कृष्ण, विवेक भारद्वाज और नवनीत सहगल सहित अन्य पूर्व अधिकारी शामिल बताए गए हैं। पत्र के जरिए उन्होंने निर्वाचन आयोग और SIR प्रक्रिया के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया है। दूसरी ओर, SIR और चुनावी पारदर्शिता को लेकर जारी बहस में विभिन्न राजनीतिक दलों और अन्य पक्षों के तर्कों का मूल्यांकन तथ्यों, आधिकारिक आंकड़ों और प्रमाणों के आधार पर किया जाना महत्वपूर्ण है।
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