Delhi Protest : दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर की गई सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर असर को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाया कि आंदोलन को लेकर इतनी सख्ती की जरूरत क्यों पड़ी और यात्रियों को परेशानी का सामना क्यों करना पड़ रहा है। गहलोत ने दावा किया कि प्रदर्शन के कारण ट्रेनें रद्द करने और करीब 57 मेट्रो सेवाएं बंद करने जैसी स्थिति बनी। उन्होंने सरकार से पूछा कि ये सेवाएं कब तक प्रभावित रहेंगी और आम लोगों की मुश्किलों की जिम्मेदारी कौन लेगा।
नितिन नबीन के बयान पर भी जताई आपत्ति
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटने संबंधी बयान पर भी गहलोत ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष के खिलाफ धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। गहलोत ने आरोप लगाया कि विपक्ष पर विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने या अराजकता फैलाने जैसे आरोप लगाकर आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने नितिन नबीन से सवाल किया कि ऐसी चेतावनी किसके निर्देश पर दी गई। गहलोत के मुताबिक, सरकार को राजनीतिक विरोध का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देना चाहिए, न कि युवाओं के संघर्ष को दबाने की कोशिश करनी चाहिए।
लोकतांत्रिक आंदोलन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक मुकाबला विचारों और तर्कों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती और पाबंदियों का सहारा लिया जा रहा है। उनके अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध को लेकर ऐसी स्थिति पैदा होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की। हालांकि, परिवहन सेवाओं पर वास्तविक असर और पाबंदियों के कारणों की पुष्टि संबंधित रेलवे तथा मेट्रो प्रशासन की आधिकारिक जानकारी से की जानी चाहिए।
संबित पात्रा के बयान पर राहुल गांधी का किया जिक्र
भाजपा नेता संबित पात्रा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मीडिया के सामने अपनी बात रखी थी। गहलोत के अनुसार, राहुल गांधी ने बताया था कि राष्ट्रपति ने मामले में साक्ष्य की बात की और उन्होंने दस्तावेज उपलब्ध कराने की पेशकश की। गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता बहस के दौरान नकारात्मक रुख अपनाते हैं और जनता उनकी बातों पर भरोसा नहीं करेगी। ये टिप्पणियां कांग्रेस और भाजपा के बीच जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा हैं।
रोजगार, किसानों और पुराने विवादों पर उठाए सवाल
गहलोत ने केंद्र सरकार के पुराने वादों का भी जिक्र किया। उन्होंने दो करोड़ नौकरियां देने और किसानों की आय दोगुनी करने के वादे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इनका क्या हुआ। उन्होंने अन्ना हजारे के आंदोलन और लोकपाल के मुद्दे को भी उठाया। इसके साथ ही उन्होंने 2G स्पेक्ट्रम और कोयला आवंटन विवाद का उल्लेख करते हुए पूछा कि तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार पर लगाए गए आरोपों का नतीजा क्या निकला।
नाना पटोले ने भी पाबंदियों की आलोचना की
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने भी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर लगाई गई पाबंदियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनता का सामना करने से डर रही है और देश में आपातकाल जैसे हालात बना दिए गए हैं। पटोले ने कहा कि लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि 2014 से देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है। ये बयान विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार की नीतियों और प्रदर्शन संबंधी पाबंदियों पर उठाए जा रहे सवालों को दर्शाते हैं।
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