अमेरिका ने TCS, Infosys और Wipro समेत आठ बड़ी कंपनियों पर PERM कार्यक्रम से जुड़ी कार्रवाई की है। लेकिन आंकड़े एक अलग कहानी बताते हैं। TCS के ग्रीन कार्ड आवेदन 2024 के 1,804 से घटकर 2026 में सिर्फ दो रह गए। क्या इससे कार्रवाई का असर सीमित रहेगा?
अमेरिका ने TCS, Infosys और Wipro समेत आठ बड़ी कंपनियों पर PERM कार्यक्रम से जुड़ी कार्रवाई की है। लेकिन आंकड़े एक अलग कहानी बताते हैं। TCS के ग्रीन कार्ड आवेदन 2024 के 1,804 से घटकर 2026 में सिर्फ दो रह गए। क्या इससे कार्रवाई का असर सीमित रहेगा?

Green Card Applications : अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों के खिलाफ स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (PERM) से जुड़ी कार्रवाई के बाद तकनीकी क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी प्रशासन ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक सहित आठ कंपनियों को इस कार्यक्रम से निलंबित किया है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े संकेत देते हैं कि इन कंपनियों की ओर से ग्रीन कार्ड के लिए किए जाने वाले आवेदनों में पहले ही कमी आई है। ऐसे में इस कार्रवाई का तत्काल व्यावसायिक प्रभाव शुरुआती आशंकाओं से कम हो सकता है।

बताई गई कार्रवाई में टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक, कैपजेमिनी, कॉग्निजेंट, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं। ये कंपनियां अमेरिका में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को रोजगार देती हैं, जिनमें भारतीय पेशेवर भी शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन की चिंता है कि विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी श्रम प्रमाणन प्रक्रिया का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों के रोजगार अवसरों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, कार्रवाई के व्यापक परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि निलंबन की शर्तें क्या हैं और कंपनियों की मौजूदा नियुक्ति योजनाओं पर इसका कितना असर पड़ता है।

स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदनों के उपलब्ध विश्लेषण के अनुसार, टीसीएस ने अमेरिकी वित्त वर्ष 2026 में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के तहत केवल दो आवेदन किए। इसके मुकाबले कंपनी ने 2025 में 513 और 2024 में 1,804 आवेदन किए थे। इन आंकड़ों से पता चलता है कि टीसीएस के आवेदन पिछले दो वर्षों की तुलना में काफी कम हुए हैं। हालांकि, कम आवेदन संख्या अपने आप में यह साबित नहीं करती कि कंपनी की अमेरिका में भर्ती या कारोबार गतिविधियों में उसी अनुपात में गिरावट आई है।
एचसीएल टेक ने 2026 में 59 PERM आवेदन किए, जबकि 2025 में यह संख्या 323 थी। विप्रो ने 2024 में 257 और 2025 में 523 आवेदन किए थे। विप्रो के 2024 के आंकड़ों में 169 आवेदन खारिज हुए, जबकि कंपनी ने 88 आवेदन वापस ले लिए थे। इन आंकड़ों से कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदन में उतार-चढ़ाव दिखाई देता है। इन्फोसिस ने 2024 में 87 आवेदन किए थे, लेकिन 2025 और 2026 के लिए उसके आवेदन संबंधी आंकड़े उपलब्ध नहीं बताए गए हैं।
एचसीएल टेक के पूर्व सीईओ विनीत नायर ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पिछले साल जारी किए गए 1,17,849 PERM प्रमाणपत्रों में भारतीय आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी 1,400 से कम थी। उनके मुताबिक, यह कुल संख्या के दो प्रतिशत से भी कम है। इस आधार पर उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी कार्रवाई का प्रत्यक्ष असर शुरुआती अनुमानों से कम हो सकता है। यह आकलन भारतीय आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी पर आधारित है; अलग-अलग कंपनियों पर प्रभाव उनकी जरूरतों और लंबित आवेदनों के अनुसार अलग हो सकता है।

PERM ट्रैकर वेबसाइट के अनुसार, कैपजेमिनी ने 2026 में 98 आवेदन किए, जबकि 2025 में 361 और 2024 में 300 आवेदन किए थे। कॉग्निजेंट ने 2024 में 1,236 आवेदन किए थे। कंपनी के 2025 और 2026 के आंकड़े उपलब्ध नहीं बताए गए हैं। इन आंकड़ों से सभी कंपनियों के लिए एक समान रुझान निकालना उचित नहीं होगा, क्योंकि आवेदन की संख्या हर साल बदल सकती है।
अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा जारी स्थायी श्रम प्रमाणन नियोक्ता को किसी विदेशी कर्मचारी को अमेरिका में स्थायी रूप से नियुक्त करने की प्रक्रिया में मदद करता है। वर्क वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे कई पेशेवरों के लिए PERM आवेदन ग्रीन कार्ड यानी स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया का शुरुआती चरण होता है। इसलिए इस कार्यक्रम से निलंबन का असर कंपनी की भविष्य की प्रायोजन योजनाओं पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव जानने के लिए निलंबन की अवधि, शर्तों और प्रत्येक कंपनी की स्थिति से जुड़े आधिकारिक विवरणों को देखना जरूरी होगा।
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