Supreme Court : दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान वकीलों को हिरासत में लेने तथा पुलिस की कथित ज्यादतियों का मामला सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में उठा। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने यह मुद्दा उठाते हुए पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने अदालत से मामले में हस्तक्षेप करने और पुलिस को संयम बरतने का संदेश देने का अनुरोध किया।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर CJI का बयान
मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट को व्यवधान पैदा करने का केंद्र नहीं बनने दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक वकील और बार के सदस्य को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है। यह अधिकार निर्धारित प्रदर्शन स्थलों और संबंधित नियमों के दायरे में होना चाहिए। अदालत की टिप्पणी से स्पष्ट हुआ कि शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और न्यायिक परिसर की व्यवस्था, दोनों का सम्मान आवश्यक है।
प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के आरोप
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ निजी लोग लाठी-डंडे लेकर घूम रहे थे और प्रदर्शनकारियों पर हमला कर रहे थे। उनके मुताबिक, पुलिस की मौजूदगी के बावजूद ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने दावा किया कि कुछ बच्चों के सिर पर बार-बार लाठियों से हमला किया गया। अधिवक्ता ने कहा कि कथित घटनाओं के वीडियो उपलब्ध हैं, जिन्हें मंगलवार को अदालत के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है।
वरिष्ठ वकीलों के साथ बदसलूकी का आरोप
शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता फरासत को कथित तौर पर सड़कों पर घसीटा गया। उन्होंने डीएन द्विवेदी और उत्तरा बब्बर का भी उल्लेख करते हुए कहा कि दो अन्य वकीलों को बसों में हिरासत में लिया गया था। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने पहले कभी वरिष्ठ वकीलों के साथ इस तरह का व्यवहार होते नहीं देखा। उन्होंने पुलिस की जवाबदेही तय करने और वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया।
BNSS की धारा 163 के आदेश पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान प्रदर्शन से संबंधित भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत जारी आदेश का मुद्दा भी उठाया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता के अनुसार, संबंधित आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में एक कानूनी प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। उन्होंने अनुरोध किया कि मामले को पहले से लंबित संबंधित याचिकाओं के साथ सुना जाए।
अवमानना मामले की सुनवाई मंगलवार को
CJI सूर्यकांत ने मामले को मंगलवार को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। इससे पहले रविवार को हुई विशेष सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निहत्थे नागरिकों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से नहीं रोका जाना चाहिए।
राहुल गांधी और खरगे की मुलाकात पर भी चर्चा
दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की ओर से कथित वोट चोरी के मुद्दे पर मुलाकात का समय मांगे जाने पर CJI ने बताया कि अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके कारणों की जानकारी लिखित रूप में विपक्ष को भेज दी गई है। वहीं, माकपा सांसद जॉन ब्रिटास की ओर से पुलिस के कथित दुर्व्यवहार को लेकर पत्र लिखे जाने के संदर्भ में CJI ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अदालत में याचिका दायर करने का अधिकार है। कानून के अनुसार उस पर विचार करना न्यायपालिका का कर्तव्य है।
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