Kerala News: देशभर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केरल विधानसभा ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया। विधानसभा में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठाई गई। समाचार में दी गई जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन की ओर से प्रस्तुत इस प्रस्ताव को सदन ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी। इस घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस को फिर तेज कर दिया है।
SIR प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों पर उठे सवाल
प्रस्ताव में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि प्रक्रिया के दौरान पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित होने का खतरा पैदा हो रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक, मतदाता सूची से नाम हटाने या संशोधित करने में कथित अनियमितताओं को दूर करना आवश्यक है। विधानसभा ने मांग की कि जिन योग्य नागरिकों के नाम गलत तरीके से सूची से हटाए गए हैं, उनके मताधिकार की बहाली के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर जताई चिंता
केरल विधानसभा में पारित प्रस्ताव में निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। प्रस्ताव का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया में नागरिकों का विश्वास बनाए रखना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। यदि पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने की शिकायतें सामने आती हैं, तो उनका निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाना चाहिए। हालांकि, प्रस्ताव में लगाए गए आरोपों और SIR प्रक्रिया से संबंधित दावों का स्वतंत्र सत्यापन अलग विषय है।
चुनाव आयुक्तों की चयन समिति बदलने की मांग
प्रस्ताव में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव करने की भी वकालत की गई है। इसमें चयन समिति का पुनर्गठन करने की मांग उठाई गई है, ताकि निर्वाचन आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता और विश्वसनीयता मजबूत हो सके। प्रस्ताव के अनुसार, समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। इस मांग का उद्देश्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में संतुलन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना बताया गया है।
राहुल गांधी के आंदोलन के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी मतदाता सूची और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर सरकार तथा निर्वाचन आयोग को घेरते रहे हैं। ऐसे राजनीतिक माहौल में केरल विधानसभा का प्रस्ताव महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में सामने आया है। हालांकि, प्रस्ताव पारित होने और किसी संवैधानिक पदाधिकारी को औपचारिक रूप से हटाए जाने की प्रक्रिया अलग-अलग हैं।
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र और मतदान के अधिकार पर दिया जोर
प्रस्ताव पारित होने के बाद मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है और किसी भी संस्था को नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने संविधान की रक्षा और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के प्रति केरल की प्रतिबद्धता दोहराई। इस घटनाक्रम के बाद SIR प्रक्रिया, चुनाव आयोग की भूमिका और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति व्यवस्था पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है।
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