Azerbaijan Hijab Ban : अजरबैजान में हिजाब विवाद भड़का, स्कूलों में छात्राओं को रोका, 37 लोगों की गिरफ्तारी से बढ़ा तनाव

अजरबैजान में स्कूल ड्रेस कोड को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हिजाब पहनने वाली छात्राओं को कथित तौर पर कक्षाओं में प्रवेश से रोका गया, जबकि शिक्षकों पर भी स्कार्फ हटाने का दबाव बताया गया। विरोध के बीच 37 गिरफ्तारियां हुईं। आखिर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा और धार्मिक आजादी की इस लड़ाई का अगला मोड़ क्या होगा?

Azerbaijan Hijab Ban : अजरबैजान में स्कूल यूनिफॉर्म के नए नियमों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिजाब पहनकर स्कूल पहुंचने वाली छात्राओं को कक्षाओं में प्रवेश से रोका गया, जबकि कुछ महिला शिक्षकों से सिर पर पहना स्कार्फ हटाने को कहा गया। इस फैसले के बाद धार्मिक स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार को लेकर बहस शुरू हो गई है।

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कैबिनेट के प्रस्ताव से बढ़ा विवाद

विवाद की मुख्य वजह 21 सितंबर को अपनाया गया कैबिनेट प्रस्ताव नंबर 309 है। इसके तहत स्कूल यूनिफॉर्म का उल्लंघन करने वाले और धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के सिद्धांतों के विपरीत माने जाने वाले अतिरिक्त कपड़ों पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। सरकारी समाचार एजेंसी APA के अनुसार, इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में समान ड्रेस कोड लागू करना है।

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धार्मिक आजादी बनाम धर्मनिरपेक्ष शिक्षा

अजरबैजान की लगभग 96 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। हालांकि, देश का संविधान उसे धर्मनिरपेक्ष घोषित करता है और धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। सरकार का तर्क है कि स्कूलों में एक समान ड्रेस कोड जरूरी है, जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि हिजाब व्यक्तिगत और धार्मिक पसंद है। इसके कारण बच्चों को शिक्षा से वंचित करना उचित नहीं है।

छात्राओं और शिक्षकों के समर्थन में प्रदर्शन

JAMnews की रिपोर्ट के अनुसार, बाकू के स्कूल नंबर 322 और बालाखानी क्षेत्र के स्कूल नंबर 69 में छात्राओं के समर्थन में विरोध हुआ। कुछ छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और मांग की कि हिजाब पहनने वाली छात्राओं को स्कूल में पढ़ने दिया जाए। जलीलबाद और खोखमेली में भी प्रतिबंधों को लेकर नाराजगी सामने आई।

37 लोगों की गिरफ्तारी से बढ़ा तनाव

अजरबैजान के गृह मंत्रालय ने 12 अक्टूबर को स्कूल यूनिफॉर्म नियमों से जुड़े मामलों में 37 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने शिक्षा कर्मचारियों के साथ टकराव पैदा किया, संस्थानों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की और यातायात बाधित किया। इस मामले में आपराधिक संहिता की धारा 233 के तहत कार्रवाई की गई। हालांकि, मंत्रालय ने गिरफ्तार लोगों की पहचान और कथित घटनाओं का विस्तृत विवरण नहीं दिया।

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विदेशी प्रभाव को लेकर भी उठे सवाल

राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने अक्टूबर में न्यू अजरबैजान पार्टी के सम्मेलन में शिक्षा के माध्यम से वैचारिक खतरों से बचाव की बात कही। कुछ राजनीतिक टिप्पणीकारों ने इस बयान को ईरान के धार्मिक प्रभाव से जोड़कर देखा, लेकिन राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में हिजाब का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया। इस बीच, सरकार समर्थक आवाजों ने विरोध के पीछे विदेशी प्रभाव की आशंका जताई है।

तुर्की तक पहुंचा विवाद

3 अक्टूबर को इस्तांबुल में अजरबैजान के वाणिज्य दूतावास के बाहर भी प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधों को हटाने की मांग की। तुर्की की सत्ताधारी पार्टी के प्रवक्ता ओमर सेलिक ने स्पष्ट किया कि विरोध करने वाले समूहों का उनकी पार्टी या सरकार से संबंध नहीं है। अजरबैजान में इस मुद्दे पर राय बंटी हुई है। कुछ लोग धर्मनिरपेक्ष शिक्षा का समर्थन करते हैं, जबकि अन्य का कहना है कि कपड़ों के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए।

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Chandan Das

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