Singapore Air Pollution : इंडोनेशिया के जंगलों में लगी भीषण आग से उठने वाला धुआं दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों के लिए गंभीर संकट बन गया है। बुधवार, 14 अक्टूबर को सिंगापुर में वायु प्रदूषण का स्तर इस साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। धुएं के तेजी से फैलने के कारण लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। क्षेत्रीय स्तर पर इस संकट का असर शिक्षा और सामान्य जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है।
सिंगापुर में सूक्ष्म कणों का स्तर 284 माइक्रोग्राम तक पहुंचा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सिंगापुर के पश्चिमी हिस्से में हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों यानी पार्टिकुलेट मैटर का स्तर प्रति घन मीटर 284 माइक्रोग्राम तक पहुंच गया। देश की पर्यावरण एजेंसी ने प्रदूषण की स्थिति को बेहद गंभीर श्रेणी में रखा। जंगलों की आग से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता खराब कर रहा है, जिससे खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।
पूर्वी तिमोर में तीन दिन तक स्कूलों में कक्षाएं बंद
प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच पूर्वी तिमोर की सरकार ने 15 अक्टूबर से तीन दिनों तक स्कूलों में प्रत्यक्ष कक्षाएं स्थगित करने का फैसला किया है। अधिकारियों के अनुसार, पड़ोसी देशों से फैलकर आ रहा धुआं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। मलेशिया के कई राज्यों में भी प्रदूषण के कारण पहले ही स्कूल बंद किए जा चुके हैं।
अल नीनो और सूखे से इंडोनेशिया में आग का संकट
इंडोनेशिया इस समय पिछले 11 वर्षों की सबसे भीषण जंगलों की आग का सामना कर रहा है। अल नीनो के प्रभाव से पैदा हुई अत्यधिक शुष्क परिस्थितियों ने आग को फैलने के लिए अनुकूल माहौल दिया है। आग पर काबू पाने के लिए राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने अतिरिक्त दमकल कर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 69 हजार से अधिक कर्मी आग बुझाने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में लगे हुए हैं।
जमीन के नीचे लगी पीटभूमि की आग बनी बड़ी चुनौती
इंडोनेशिया के आपदा प्रबंधन अधिकारियों का कहना है कि पीटभूमि में लगी आग पर काबू पाना बेहद मुश्किल है। जमीन के नीचे मौजूद जैविक पदार्थ धीरे-धीरे सुलगते रहते हैं और सतह पर आग बुझने के बाद भी दोबारा धुआं निकल सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, भारी बारिश के बिना इस संकट का स्थायी समाधान निकालना कठिन हो सकता है। यही वजह है कि आग बुझाने के प्रयासों के बावजूद धुएं का प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है।
आसियान बैठक में उठेगा सीमा पार प्रदूषण का मुद्दा
आग से पैदा हुए धुएं का मुद्दा अगले महीने होने वाली आसियान बैठक में उठाए जाने की तैयारी है। मलेशियाई सांसद सैयद सादिक ने इंडोनेशिया के खिलाफ कड़ा कूटनीतिक विरोध दर्ज कराने और जमीन जलाने में शामिल कंपनियों को वित्तीय सहायता बंद करने की मांग की है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय देशों के बीच पर्यावरणीय सहयोग और जंगलों में आग रोकने के लिए साझा रणनीति बनाने की जरूरत को फिर उजागर किया है।
प्रदूषण से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग जरूरी
दक्षिण-पूर्व एशिया में फैलता धुआं दिखाता है कि जंगलों की आग केवल एक देश की समस्या नहीं है। इसका प्रभाव सीमाओं से परे जाकर शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है। अब चुनौती यह है कि इंडोनेशिया आग पर कितनी जल्दी काबू पाता है और क्षेत्रीय देश भविष्य में ऐसे संकटों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।