Owaisi vs Pak PM : सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के बढ़ते तनाव और धमकियों के बीच, मोहम्मद असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ को सख्त चेतावनी दी है। पाकिस्तान की ओर से युद्ध की धमकी और पानी रोकने की कोशिशों के बीच ओवैसी ने कहा, “हमारे पास ब्रह्मोस है, इसे कभी मत भूलो।”

ओवैसी का पलटवार
पानी की किल्लत के चलते पहले पाकिस्तान ने भारत से पानी की गुहार लगाई, लेकिन अब वह सीधे-सीधे युद्ध की भाषा पर उतर आया है। मंगलवार को इस्लामाबाद में जनसभा के दौरान शाहबाज़ शरीफ ने चेतावनी दी कि यदि भारत सिंधु नदी का पानी रोकने की कोशिश करता है तो “उसे जीवन भर पछताना पड़ेगा।” इसके जवाब में ओवैसी ने मीडिया से कहा, “शाहबाज़ को याद रखना चाहिए कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनके बयान भी सामने आए थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब नूर एयरफोर्स बेस तबाह हुआ था, वे स्विमसूट पहनकर नहा रहे थे। इसलिए उन्हें अपनी खोखली बातें बंद करनी चाहिए।”

‘सिंधु जल संधि स्थगित, पाकिस्तान को स्वभाव सुधारना होगा’
ओवैसी ने यह भी कहा कि भारत ने सिंधु जल संधि को अस्थायी तौर पर स्थगित कर दिया है, जिसका मतलब है कि पाकिस्तान को अपने व्यवहार में बदलाव लाना चाहिए। “अगर धमकियाँ जारी रखेंगे तो इसका उल्टा असर होगा,” उन्होंने स्पष्ट किया।
सेना प्रमुख की मिसाइल धमकी
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने भी हाल ही में परमाणु शक्ति संपन्न देश होने की बात दोहराते हुए कहा, “अगर भारत सिंधु पर बांध बनाएगा, तो हम 10 मिसाइलों से उस बांध को नष्ट कर देंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि सिंधु नदी पाकिस्तान की “पैतृक संपत्ति” है और भारत को बांध बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
भारत ने धमकियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी
हालांकि, भारत सरकार ने अभी तक पाकिस्तान के इन खतरनाक बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इन धमकियों को गंभीरता से लेते हुए परिपक्व और संयमित रणनीति अपनाएगा।
‘ब्रह्मोस’ भारत की ताकत का प्रतीक
ओवैसी का ‘ब्रह्मोस’ का ज़िक्र इस बात का संकेत है कि भारत अपने सुरक्षा उपकरणों और रणनीतिक ताकतों पर भरोसा रखता है। ब्रह्मोस मिसाइल, जो भारत और रूस की संयुक्त विकास है, भारत की सैन्य शक्ति की एक प्रमुख मिसाल मानी जाती है।
पाकिस्तान द्वारा सिंधु जल संधि को लेकर लगातार बढ़ती धमकियाँ और भारत की ‘ब्रह्मोस’ जैसी मजबूत सैन्य ताकतों का उल्लेख कर विपक्ष के नेता जैसे ओवैसी ने सरकार को सशक्त समर्थन दिया है। यह गतिरोध न केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकता है, बल्कि दोनों देशों के बीच पानी और सुरक्षा के मुद्दों पर गंभीर टकराव का कारण बन सकता है।










