PM Awas Yojana fraud: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में पीएम आवास योजना में फर्जीवाड़ा, मनरेगा राशि का गड़बड़ियों पर प्रशासन ने जताई सख्ती

PM Awas Yojana fraud: छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत भ्रष्टाचार का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में गरियाबंद जिले के लफंदी पंचायत से एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें आवास निर्माण के लिए दी जाने वाली मनरेगा मजदूरी राशि का गलत इस्तेमाल किया गया। इस मामले ने एक बार फिर योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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मामला क्या है?

गरियाबंद जिले के लफंदी पंचायत में आवास योजना के तहत मजदूरी के लिए आवंटित मनरेगा राशि में गड़बड़ी उजागर हुई है। रोजगार सहायक द्वारा मजदूरों के मस्टरोल में बोगस नामों से लगभग 40 हितग्राहियों के लिए 4 लाख रुपये से अधिक की मजदूरी राशि निकाल ली गई। जब आवास हितग्राहियों ने ऑनलाइन मजदूरों की सूची चेक की तो फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ।

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ग्रामीणों की कार्रवाई और प्रशासन की प्रतिक्रिया

इस खुलासे के बाद पंचायत के लोगों ने एक बैठक कर उच्च अधिकारियों से शीघ्र कार्रवाई की मांग की। मंगलवार को लगभग 40-50 ग्रामीण गरियाबंद कलेक्ट्रेट में जनदर्शन के लिए पहुंचे और अपने लिखित आवेदन के माध्यम से कलेक्टर से शिकायत दर्ज कराई। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बताया कि शिकायत के बाद लफंदी पंचायत जांच टीम भेज दी गई है।कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कहा, “शिकायत सही पाई जाने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार को बख्शा नहीं जाएगा।”

गरियाबंद में पहले भी सामने आए भ्रष्टाचार के मामले

गरियाबंद जिले में पीएम आवास योजना से जुड़ी भ्रष्टाचार की शिकायतें नयी नहीं हैं। इससे पहले अधूरे आवासों को पूर्ण बताना, बोगस जियो टैगिंग, आवास मंजूरी के लिए रिश्वत मांगने जैसे कई मामले उजागर हो चुके हैं। ये मामले योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता को प्रभावित करते हैं।

पीएम आवास योजना की विश्वसनीयता पर प्रभाव

मनरेगा जैसी योजनाओं का मकसद ग्रामीण गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराना और रोजगार प्रदान करना है। लेकिन इस तरह के भ्रष्टाचार से योजना का उद्देश्य प्रभावित होता है। इसके चलते वास्तविक लाभार्थियों तक सहायता नहीं पहुंच पाती और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की छवि धूमिल होती है।

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पीएम आवास योजना के तहत मनरेगा मजदूरी राशि में हुए फर्जीवाड़े ने भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होने का सबूत दिया है। हालांकि प्रशासन की जांच और सख्ती ने एक सकारात्मक संदेश दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई और नियमित निगरानी आवश्यक है ताकि योजनाओं का सही लाभ गरीब और जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।

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