Ram Mandir CEO : अयोध्या के भव्य राम मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था और परिसर के सुचारू संचालन को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया है। यह नियुक्ति मंदिर के प्रशासनिक प्रबंधन को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
ट्रस्ट की बैठक में हुआ महत्वपूर्ण फैसला
राम मंदिर ट्रस्ट की बुधवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति पर अंतिम सहमति बनी। CEO पद के लिए देशभर से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। जानकारी के मुताबिक, कुल 5,585 से अधिक आवेदनों की स्क्रीनिंग की गई। चयन प्रक्रिया के कई चरणों के बाद शीर्ष तीन दावेदारों में से जितेंद्र मिश्र के नाम पर मुहर लगाई गई।
ट्रस्ट में तीन नए सदस्य भी शामिल
CEO की नियुक्ति के साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इन नियुक्तियों से ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को विस्तार मिला है। बुधवार की बैठक में अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, स्वामी कमलनयन दास, अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, ट्रस्टी महंत दीनेंद्र दास और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि समेत कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र?
जितेंद्र मिश्र का सैन्य करियर बेहद लंबा और अनुभव से भरपूर रहा है। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हासिल किया था। इसके बाद करीब चार दशक तक उन्होंने वायुसेना में अलग-अलग महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं। उनके करियर को अनुशासन, नेतृत्व और रणनीतिक क्षमता के लिए जाना जाता है।
पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख रह चुके हैं
जितेंद्र मिश्र को 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान का एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ नियुक्त किया गया था। यह वायुसेना की बेहद महत्वपूर्ण कमानों में से एक है। उन्होंने इस पद पर रहते हुए करीब 16 महीने तक जिम्मेदारी संभाली और 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए।
3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव
जितेंद्र मिश्र के पास 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर के साथ-साथ एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी रहे हैं। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। यह व्यापक अनुभव उनके पेशेवर कौशल और बहुआयामी सैन्य प्रशिक्षण को दर्शाता है।
विशिष्ट सेवा मेडल से हो चुके हैं सम्मानित
लंबे सैन्य करियर के दौरान जितेंद्र मिश्र को उनकी सेवाओं के लिए सम्मानित भी किया गया। वर्ष 2013 में उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल प्रदान किया गया था। सैन्य क्षेत्र में उनके योगदान और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। यही अनुभव अब राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन में काम आ सकता है।
रणनीतिक योजना और कमान प्रबंधन में अनुभव
जितेंद्र मिश्र का अनुभव केवल लड़ाकू विमान उड़ाने तक सीमित नहीं रहा। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने रणनीतिक योजना, संचालन और कमान प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभाईं। बड़े स्तर पर संसाधनों के प्रबंधन, सुरक्षा संबंधी निर्णय लेने और विभिन्न टीमों के बीच समन्वय स्थापित करने का उनका अनुभव राम मंदिर जैसे बड़े धार्मिक परिसर के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
श्रद्धालुओं की भीड़ संभालना होगी बड़ी चुनौती
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाए रखना बड़ी चुनौती है। पूर्णकालिक CEO के रूप में जितेंद्र मिश्र को इन सभी व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
सुरक्षा और प्रशासन पर रहेगा खास फोकस
राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था बेहद संवेदनशील है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ सुरक्षा मानकों को बनाए रखना ट्रस्ट के लिए महत्वपूर्ण है। जितेंद्र मिश्र का सैन्य अनुभव इस क्षेत्र में विशेष रूप से मददगार साबित हो सकता है। उनके सामने मंदिर प्रशासन को आधुनिक, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की चुनौती भी होगी।
पहली पूर्णकालिक CEO नियुक्ति क्यों खास?
राम मंदिर ट्रस्ट के इतिहास में जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO होंगे। इससे प्रशासनिक कार्यों के लिए एक स्पष्ट और समर्पित नेतृत्व व्यवस्था तैयार होगी। अब उनकी जिम्मेदारी मंदिर के नियमित संचालन से लेकर सुरक्षा, प्रबंधन और श्रद्धालुओं से जुड़ी व्यवस्थाओं के बेहतर समन्वय तक होगी।
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