Nagpur School News : नागपुर के सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत स्कूलों की कथित बदहाल स्थिति को सामने रखा है। CJP का दावा है कि कुछ सरकारी स्कूलों में बच्चों को जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। पार्टी ने स्कूल परिसरों में नशीली चीजों के इस्तेमाल से लेकर खराब स्वच्छता और अपर्याप्त कक्षाओं जैसी समस्याओं का मुद्दा उठाया है।
स्कूल परिसर में नशीली चीजों के इस्तेमाल का आरोप
CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए नागपुर के सरकारी स्कूलों की स्थिति पर चिंता जताई। पार्टी ने आरोप लगाया कि कुछ स्कूल परिसरों में शराब और अन्य नशीली चीजों का सेवन करते हुए लोगों को देखा गया है। संगठन ने सवाल उठाया कि यदि स्कूल परिसर में ऐसी गतिविधियां हो रही हैं तो बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार विभागों की ओर से क्या कार्रवाई की जा रही है।
गंदे वॉशरूम और पानी की कमी का दावा
पार्टी ने सरकारी स्कूलों में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी कई आरोप लगाए हैं। CJP के मुताबिक, कुछ स्कूलों के वॉशरूम गंदे और इस्तेमाल के लिहाज से खराब स्थिति में हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त पीने का पानी उपलब्ध नहीं होने का भी दावा किया गया है। संगठन ने कहा कि बच्चों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
असुरक्षित भोजन और क्लासरूम की कमी का मुद्दा
CJP ने स्कूलों में विद्यार्थियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि बच्चों को असुरक्षित खाना मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। इसके साथ ही कई स्कूलों में पर्याप्त क्लासरूम नहीं होने का दावा किया गया है। पार्टी के अनुसार, जगह की कमी के कारण अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक ही कमरे में बैठकर पढ़ना पड़ रहा है।
छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर सवाल
CJP ने विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर भी गंभीर दावा किया है। पार्टी के मुताबिक, कुछ सातवीं कक्षा के छात्रों को अभी तक पांचवीं कक्षा की मार्कशीट नहीं मिली है। संगठन ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराना स्कूल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
‘ऐसे स्कूल में बच्चों को कैसे भेजें?’
CJP ने स्कूलों की कथित स्थिति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अभिभावक अपने बच्चों को ऐसे माहौल में पढ़ने के लिए कैसे भेज सकते हैं। पार्टी ने अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं में सुधार करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए।
क्या है CJP का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान?
CJP का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान सरकारी स्कूलों में मौजूद कमियों को सामने लाने और संबंधित अधिकारियों तक उनकी जानकारी पहुंचाने पर केंद्रित है। पार्टी के फाउंडर और नेशनल कन्वीनर अभिजीत दीपके ने 15 अगस्त को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित अपने पैतृक गांव संटुक पिंपरी से इस अभियान की शुरुआत की थी।
नागरिकों और अभिभावकों से निरीक्षण की अपील
अभियान के तहत CJP ने नागरिकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और वॉलंटियर्स से सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने की अपील की है। संगठन की ओर से बुनियादी सुविधाओं की एक चेकलिस्ट तैयार की गई है। लोगों को स्कूलों में दिखाई देने वाली समस्याओं को दर्ज करने और जरूरत पड़ने पर तस्वीरें या वीडियो बनाकर संगठन तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
संटुक पिंपरी स्कूल से हुई अभियान की शुरुआत
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत संटुक पिंपरी के एक सरकारी स्कूल के निरीक्षण से हुई थी। CJP ने वहां कथित तौर पर टूटी खिड़कियां, साफ-सफाई की समस्या, पीने के पानी की कमी और विद्यार्थियों के बैठने के लिए अपर्याप्त व्यवस्था जैसी कमियों को उजागर किया। इसके बाद अभियान का विस्तार महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रों और दूसरे राज्यों के सरकारी स्कूलों तक किए जाने का दावा किया गया।
कुछ स्कूलों में सुधार का CJP ने किया दावा
CJP का दावा है कि अभियान के जरिए समस्याएं सामने आने के बाद कुछ स्कूलों में सुधार की कार्रवाई भी हुई। अभिजीत दीपके के गांव के सरकारी स्कूल में बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं को उजागर किए जाने के बाद मरम्मत का काम शुरू होने की बात कही गई। संगठन के अनुसार, इसके बाद स्कूल को पहला कंप्यूटर सिस्टम और विद्यार्थियों के लिए बेंच भी मिलीं।
देशभर में सरकारी स्कूलों की सुविधाओं पर बहस
CJP के मुताबिक, अभियान के विस्तार के साथ अलग-अलग राज्यों से स्वयंसेवकों द्वारा सरकारी स्कूलों की समस्याएं दर्ज की जा रही हैं। इनमें खराब शौचालय, टूटी खिड़कियां, पीने के पानी की कमी, शिक्षकों की कमी और अपर्याप्त क्लासरूम जैसी समस्याएं शामिल बताई गई हैं। नागपुर को लेकर लगाए गए आरोपों ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बहस तेज कर दी है।
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