Ajit Doval Speech: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने पुणे में आयोजित लोकमान्य तिलक पुरस्कार समारोह के दौरान युवाओं को राष्ट्रहित और आजादी के वास्तविक अर्थ पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। समारोह के दौरान डोभाल ने कहा कि आजादी का मतलब केवल अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी करने की छूट नहीं है, बल्कि इसके साथ जिम्मेदारियां और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने युवाओं से देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

आजादी के पीछे है लंबा संघर्ष और बलिदान का इतिहास
अजीत डोभाल ने अपने संबोधन में कहा कि नई पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि भारत की स्वतंत्रता लाखों लोगों के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कई बार युवा आजादी को केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में देखते हैं, जबकि इसकी वास्तविक भावना कहीं अधिक व्यापक है। देश की आजादी केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। इसलिए हर नागरिक का दायित्व है कि वह राष्ट्र के विकास और सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाए।

राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की दी सलाह
NSA डोभाल ने कहा कि युवाओं को अपने जीवन में ऐसे निर्णय लेने चाहिए जो देश के हित में हों। उन्होंने कहा कि यदि कभी निजी स्वार्थ और राष्ट्रहित के बीच चुनाव करना पड़े तो राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर देश की उन्नति और समाज के कल्याण के लिए कार्य करें। उनका मानना है कि इसी सोच के साथ भारत भविष्य में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।
अधिकारों के साथ कर्तव्यों को समझना भी जरूरी
अपने संबोधन में अजीत डोभाल ने अधिकारों के दुरुपयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को कई अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन इन अधिकारों का उपयोग जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ होना चाहिए। यदि अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया जाता है तो इससे समाज और राष्ट्र दोनों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
युवाओं से निजी हितों का त्याग करने की अपील
डोभाल ने कहा कि भारत के युवाओं में अपार क्षमता है और यदि वे राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ेंगे तो देश का भविष्य और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे निजी हितों को पीछे छोड़कर देश की प्रगति में योगदान देने का संकल्प लें। यदि मन में व्यक्तिगत लाभ की भावना आए भी, तो उसे राष्ट्रहित के सामने महत्व नहीं देना चाहिए। उनके अनुसार यही सोच भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

लोकमान्य तिलक पुरस्कार से हुए सम्मानित
1 अगस्त को आयोजित इस समारोह में अजीत डोभाल को प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। समारोह के दौरान डोभाल ने कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है और देश के सामने नए अवसर मौजूद हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि युवा जिम्मेदारी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ेंगे तो भारत अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करते हुए इतिहास का नया अध्याय लिखेगा। उन्होंने कहा कि मजबूत राष्ट्र का निर्माण केवल सरकार नहीं, बल्कि जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों के सहयोग से ही संभव है।
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