Caste Census India
Caste Census India: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आगामी 16वीं जनगणना की अधिसूचना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। अखिलेश यादव का दावा है कि सरकार द्वारा जारी हालिया अधिसूचना में ‘जाति’ से संबंधित कॉलम को ही शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने इसे एक बड़ी रणनीतिक चूक नहीं, बल्कि पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचलने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि जातिगत जनगणना न कराना भाजपा का एक नया ‘जुमला’ है। उनके अनुसार, भाजपा का यह पुराना फॉर्मूला है कि जब गिनती ही नहीं होगी, तो आनुपातिक आरक्षण का आधार भी तैयार नहीं हो पाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना जातिगत आंकड़ों के पिछड़ों और वंचितों (PDA – पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को उनके हक और अधिकार देना असंभव है। सपा प्रमुख के मुताबिक, यह कदम पीडीए समाज के विकास को रोकने की भाजपाई साजिश का हिस्सा है।
भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि आज भाजपा पर विश्वास करने वाले लोग खुद को ठगा हुआ और अपमानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के वे नेता जो अब तक जनता के बीच जाकर जातिगत जनगणना होने का दावा कर रहे थे, अब समाज में मुंह दिखाने के लायक नहीं रहे। यादव ने दावा किया कि जमीनी स्तर पर नाराजगी इतनी अधिक है कि कार्यकर्ताओं को अपने घरों और वाहनों से भाजपा के झंडे और पट्टे उतारने पड़ रहे हैं।
सपा प्रमुख ने सरकार की मंशा पर संदेह जताते हुए कहा कि जब विपक्ष और जनता का दबाव बढ़ेगा, तो ‘छलजीवी भाजपा’ इसे महज एक ‘टाइपिंग मिस्टेक’ बताकर अपना पल्ला झाड़ लेगी। उन्होंने भाजपा को ‘वचन-विमुखी’ (अपने वादे से मुकरने वाली) बताते हुए कहा कि अब शब्दकोशों में भाजपा का अर्थ ‘धोखा’ लिख देना चाहिए। अखिलेश ने पीडीए समाज का आह्वान किया कि उन्हें अपने मान-सम्मान और आरक्षण की रक्षा के लिए अब स्वयं ही सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़नी होगी।
भारत की 16वीं जनगणना की प्रक्रिया अब आधिकारिक रूप से शुरू होने वाली है। केंद्र सरकार ने उन प्रश्नों की सूची अधिसूचित कर दी है, जो जनगणना के पहले चरण में नागरिकों से पूछे जाएंगे। यह चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच पूरे देश में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान हर घर और संरचना का मानचित्रण किया जाएगा। हालांकि, विपक्ष का मुख्य विरोध इस बात पर है कि इसमें सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) को शामिल क्यों नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना में जाति का कॉलम न होना आने वाले समय में उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनेगा। अखिलेश यादव इस मुद्दे को लेकर आगामी चुनावों में सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में हैं। उनका तर्क है कि जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि किस समाज की जनसंख्या कितनी है, तब तक न्यायोचित आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पाएगा।
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