UP Assembly Session: उत्तर प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार, 3 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी ने विभिन्न जनहित और राजनीतिक मुद्दों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी के विधायक सदन में किसानों, शिक्षा, सरकारी स्कूलों की स्थिति, बेरोजगारी, आरक्षण, पेपर लीक, एमएसपी, एक्सप्रेसवे निर्माण, शिक्षकों की भर्ती, जौहर विश्वविद्यालय सहित कई विषयों को प्रमुखता से उठाएंगे। उनका कहना है कि विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती के साथ विधानसभा में रखेगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर साधा निशाना
सत्र शुरू होने से एक दिन पहले लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विधानसभा में विपक्ष सरकार से कई अहम सवाल पूछेगा। उनके अनुसार सरकार जनता के मुद्दों का सामना करने से बचना चाहती है। उन्होंने किसानों की समस्याओं, खाद की कमी और कृषि व्यवस्था को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पहले खाद की बोरी से चोरी की शिकायतें आती थीं, लेकिन अब पूरी बोरी गायब होने जैसी स्थिति बन गई है।

जौहर विश्वविद्यालय को लेकर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने जौहर विश्वविद्यालय के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का रवैया शुरू से ही विश्वविद्यालय के प्रति नकारात्मक रहा है। उनका कहना था कि जो संस्थान विकसित नहीं कर सके, वे अब शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करने में लगे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार का उद्देश्य विश्वविद्यालय को नुकसान पहुंचाना है और यह शिक्षा व्यवस्था के हित में नहीं माना जा सकता।
सरकारी स्कूलों की संख्या को लेकर किया बड़ा दावा
सपा प्रमुख ने सरकारी स्कूलों के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में उत्तर प्रदेश में 1,13,938 सरकारी स्कूल संचालित थे, जबकि अब उनकी संख्या में लगभग 26 हजार की कमी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी जब इन आंकड़ों को सार्वजनिक करने लगी तो संबंधित सरकारी वेबसाइट को बंद कर दिया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग आधिकारिक स्रोतों से होना बाकी है।
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र का भी किया जिक्र
प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि सबसे अधिक प्राथमिक विद्यालय लखीमपुर खीरी जिले में बंद हुए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि गोरखपुर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी कई सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों पर विधानसभा में विस्तृत चर्चा की जाएगी और सरकार से जवाब मांगा जाएगा।

पीडीए समाज और छात्रों को लेकर लगाए आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का सबसे अधिक असर पिछड़े, दलित और आदिवासी वर्ग के छात्रों पर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2017 में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 1 करोड़ 17 लाख छात्र पढ़ते थे, जबकि अब यह संख्या घटकर करीब 89 लाख रह गई है। उन्होंने कहा कि लगभग 28 लाख छात्रों की कमी दर्ज की गई है, जिनमें बड़ी संख्या ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग से जुड़ी बताई गई। उन्होंने इन आंकड़ों को सरकारी रिकॉर्ड पर आधारित बताया।
शिक्षकों की भर्ती और खाली पदों का मुद्दा
सपा अध्यक्ष ने शिक्षकों की संख्या में कमी का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश में लगभग चार लाख शिक्षक कार्यरत थे, जबकि वर्तमान में उनकी संख्या घटकर करीब 3.40 लाख रह गई है। उन्होंने दावा किया कि एक लाख से अधिक शिक्षकों के पद अभी भी खाली हैं और सरकार नई भर्ती करने के बजाय शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में छात्राओं की संख्या में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है।
स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल
अखिलेश यादव ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि हजारों स्कूलों में बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि कई विद्यालयों में छात्राओं के लिए शौचालय और स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं का अभाव है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा नहीं है। सपा ने इन दावों को लेकर एक पुस्तिका भी जारी की है और कहा है कि विधानसभा सत्र के दौरान पार्टी के सभी विधायक इन विषयों को विस्तार से उठाएंगे। वहीं, सरकार की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया और आधिकारिक पक्ष सदन की कार्यवाही के दौरान सामने आ सकता है।
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