Alcohol Side Effects: अक्सर लोग शराब के सेवन को केवल लिवर की बीमारी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन चिकित्सा जगत के अनुसार इसका प्रभाव शरीर के हर हिस्से पर पड़ता है। शराब न केवल हृदय रोग का खतरा बढ़ाती है, बल्कि मस्तिष्क (ब्रेन) के लिए भी उतनी ही खतरनाक है। वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर नेहा पंडिता (फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा) का कहना है कि कम मात्रा में ली गई शराब भी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, सूचनाओं को ग्रहण करने की क्षमता और याददाश्त को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। भले ही ये बदलाव शुरुआत में मामूली महसूस हों, लेकिन लंबे समय में इनका असर विनाशकारी हो सकता है।

हिप्पोकैम्पस पर प्रभाव और याददाश्त की समस्या
शराब से प्रभावित होने वाली प्रमुख मस्तिष्क संरचनाओं में से एक ‘हिप्पोकैम्पस’ है। यह हिस्सा सीखने और यादें सहेजने के लिए जिम्मेदार होता है। शराब के सेवन से मस्तिष्क की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, जिससे व्यक्ति को दैनिक घटनाओं को याद रखने में कठिनाई होने लगती है। इसे ‘ब्लैकआउट’ की स्थिति भी कहते हैं, जहाँ व्यक्ति जागरूक तो रहता है, लेकिन उसे कुछ भी याद नहीं रहता। यह स्थिति न केवल याददाश्त को कम करती है, बल्कि व्यक्ति को बेहोशी और भ्रम की स्थिति में भी डाल सकती है।

निर्णय लेने की क्षमता और एकाग्रता में गिरावट
शराब का नकारात्मक प्रभाव मस्तिष्क के ‘फ्रंटल लोब’ पर भी पड़ता है। यह क्षेत्र योजना बनाने, ध्यान केंद्रित करने, निर्णय लेने और आवेग (impulse) को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है। शराब के कारण होने वाला ‘कॉग्निटिव डिक्लाइन’ (संज्ञानात्मक गिरावट) केवल याददाश्त तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे बातचीत को समझने, नामों को याद रखने और सरल समस्याओं को हल करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। दैनिक जीवन की गतिविधियों और कार्यस्थल पर एक साथ कई काम करने (multi-tasking) की क्षमता में भी भारी कमी आने लगती है।

नींद की गुणवत्ता में कमी
अक्सर लोगों में यह गलत धारणा है कि शराब पीने से अच्छी नींद आती है। वास्तविकता इसके विपरीत है। डॉक्टर पंडिता के अनुसार, शराब ‘डीप स्लीप’ और ‘आरईएम’ (REM) नींद को बाधित करती है। ये दोनों अवस्थाएं यादों को मजबूत करने और मस्तिष्क की मरम्मत के लिए अनिवार्य हैं। नींद की गुणवत्ता खराब होने से अगले दिन एकाग्रता की कमी, सोचने में धीमापन और नई चीजें सीखने की क्षमता में गिरावट आती है।
विटामिन की कमी और गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार
लगातार शराब के सेवन से शरीर में विटामिन B1 (थायमिन) का स्तर खतरनाक रूप से गिर जाता है। थायमिन स्वस्थ मस्तिष्क के कामकाज के लिए एक अनिवार्य पोषक तत्व है। इसकी कमी से वर्निके एन्सेफेलोपैथी और कोर्साकॉफ सिंड्रोम जैसे गंभीर तंत्रिका संबंधी विकार हो सकते हैं। इन स्थितियों में मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुँच सकता है।
जीवनशैली में सुधार ही एकमात्र बचाव
शराब का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग होता है, जो उसकी उम्र, स्वास्थ्य इतिहास और आनुवंशिकता पर निर्भर करता है। डॉक्टर नेहा पंडिता सलाह देती हैं कि भूलने की बीमारी, ध्यान न लगा पाना या निर्णय लेने में स्पष्ट बदलाव को केवल ‘व्यस्त जीवनशैली’ मानकर नजरअंदाज न करें। यह शराब के सेवन का संकेत हो सकता है। मस्तिष्क को सुरक्षित रखने का एकमात्र उपाय शराब का त्याग करना और एक स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना है।
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