Gaganyaan Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम सफलतापूर्वक उठा लिया है। मंगलवार को मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित ‘हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास संस्थापन’ (ADRDE) के ड्रॉप जोन में गगनयान के क्रू मॉड्यूल के मुख्य पैराशूट का बेहद जटिल परीक्षण किया गया। बुधवार को इसरो द्वारा जारी आधिकारिक बयान में इस बात की पुष्टि की गई कि यह परीक्षण पूरी तरह से सफल रहा। इस परीक्षण का प्राथमिक उद्देश्य पहले मानवरहित गगनयान (G1) मिशन के दौरान अधिकतम संभावित भार (Load) की स्थिति में पैराशूट प्रणाली की मजबूती, कार्यक्षमता और डिजाइन की सटीकता को परखना था। यह इसरो के भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ानों के प्रति संकल्प को और अधिक मजबूत करता है।

परीक्षण की प्रक्रिया: आईएल-76 विमान से गिराया गया डमी भार
परीक्षण को पूरी तरह से वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया था। इस प्रक्रिया के दौरान एक मुख्य पैराशूट और उसके साथ एक भारी ‘डमी’ पेलोड युक्त सिम्युलेटेड असेंबली तैयार की गई। इस पूरी असेंबली को भारतीय वायु सेना के आईएल-76 परिवहन विमान के जरिए करीब 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से सफलतापूर्वक नीचे गिराया गया। जैसे ही पेलोड हवा में आया, सबसे पहले ‘ड्रोग पैराशूट’ को सक्रिय किया गया, जिसका मुख्य कार्य क्रू मॉड्यूल की अस्थिरता को खत्म करना और उसकी प्रचंड गति को नियंत्रित करना है। इसके बाद मुख्य पैराशूट को खोला गया, जिसने पेलोड की गति को धीमी करके उसे एक सुरक्षित ‘टर्मिनल वेलोसिटी’ तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आईमैट-05 शृंखला: मिशन जी-1 के लिए बढ़ाया गया भरोसा
यह परीक्षण ‘एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप परीक्षण’ (IMAT) शृंखला का पांचवां हिस्सा था, जिसे आईमैट-05 (IMAT-05) नाम दिया गया है। इसरो के वैज्ञानिकों के लिए यह चरण अत्यंत महत्वपूर्ण था क्योंकि इसका उद्देश्य मुख्य पैराशूट प्रणाली का पूर्ण प्रमाणीकरण करना था। इस सफल परीक्षण से इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है कि गगनयान के पहले मानव रहित मिशन (G1) के दौरान यह पैराशूट प्रणाली पूरी दक्षता के साथ काम करेगी। यह परीक्षण न केवल तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह गगनयान की सुरक्षा प्रोटोकॉल को भी पुख्ता करता है, जो भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए आधार स्तंभ साबित होगा।

गगनयान के सुरक्षा कवच: जटिल और आधुनिक पैराशूट प्रणाली
गगनयान मिशन की पैराशूट प्रणाली इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। क्रू मॉड्यूल को सुरक्षित लैंडिंग कराने के लिए इसमें कुल 10 विशेष प्रकार के पैराशूट लगाए गए हैं, जो चार अलग-अलग श्रेणियों में बंटे हैं। इनमें सबसे पहले दो ‘एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट’ होते हैं, जो मॉड्यूल से एपेक्स कवर को अलग करते हैं। यह एपेक्स कवर अंतरिक्ष यान के पुन: प्रवेश (Re-entry) के दौरान पैदा होने वाली अत्यधिक गर्मी से पैराशूट कंपार्टमेंट की रक्षा करने के लिए बनाया गया है। इसके बाद, प्रणाली में दो ‘ड्रोग पैराशूट’ और तीन ‘पायलट पैराशूट’ होते हैं। इन पायलट पैराशूट का प्रमुख कार्य क्रमबद्ध तरीके से तीन मुख्य पैराशूटों को सुरक्षित रूप से बाहर निकालना और तैनात करना है, ताकि यान जमीन पर सुरक्षित रूप से उतर सके। इसरो का यह प्रयास आने वाले समय में भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर और भी ऊंचाई प्रदान करेगा।
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