Ambikapur News : अंबिकापुर (सरगुजा) में निजी स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में जिला स्वास्थ्य विभाग ने एक सख्त कदम उठाया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने जिले के समस्त निजी नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब, डायग्नोस्टिक सेंटर और कलेक्शन सेंटर के संचालकों को नर्सिंग होम एक्ट-2010 के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवाएं सुरक्षित हों और संस्थान सभी निर्धारित कानूनी मानकों पर खरे उतरें। इस निर्देश के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहे निजी संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है।

आवश्यक दस्तावेज और सुरक्षा मानकों पर विभाग की पैनी नजर
विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब किसी भी निजी स्वास्थ्य संस्थान के लिए कुछ बुनियादी सुविधाएं और दस्तावेज अनिवार्य कर दिए गए हैं। इनमें अग्निशमन सुरक्षा (फायर सेफ्टी) प्रमाण-पत्र, बायोमेडिकल वेस्ट (जैव-चिकित्सा अपशिष्ट) प्रबंधन प्रमाण-पत्र, एक्स-रे बॉक्स की सुविधा और इमरजेंसी किट का होना आवश्यक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संस्थान में कार्यरत सभी चिकित्सकों का छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में वैध पंजीयन होना अनिवार्य है। यदि किसी भी संस्थान में इन दस्तावेजों या सुविधाओं की कमी पाई जाती है, तो इसे नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा।

मरीजों की सुविधाओं का ध्यान और पारदर्शिता पर जोर
प्रशासन ने न केवल दस्तावेजों, बल्कि मरीजों की मूलभूत सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया है। सीएमएचओ के निर्देशों के तहत प्रत्येक संस्थान को परिसर में नियमित साफ-सफाई, स्वच्छ शौचालयों की उपलब्धता और मरीजों व उनके परिजनों के वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संस्थानों को अपने सूचना पटल (नोटिस बोर्ड) पर स्पष्ट रूप से चिकित्सकों के नाम, उनकी शैक्षणिक योग्यता, वैध पंजीयन नंबर, उनके उपलब्ध रहने का समय और संस्थान में दी जाने वाली चिकित्सा सेवाओं की जानकारी प्रदर्शित करनी होगी। इससे आम नागरिकों को यह जानने में आसानी होगी कि वे किस प्रकार की सुविधा का लाभ उठा रहे हैं और इलाज करने वाला चिकित्सक योग्य है या नहीं।

नियमों की अनदेखी पर होगी कठोर दंडात्मक कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक परामर्श नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आदेश है। विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य संस्थानों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। यदि निरीक्षण के दौरान निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया गया या आवश्यक दस्तावेज अपूर्ण मिले, तो संबंधित संस्थान के खिलाफ नर्सिंग होम एक्ट-2010 के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने चेतावनी दी है कि आवश्यकता पड़ने पर संस्थान की अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) को स्थगित या रद्द करने की अनुशंसा भी की जा सकती है।
संचालकों से दस्तावेजों को जल्द पूर्ण करने की अपील
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जिले के सभी निजी स्वास्थ्य संस्थान संचालकों से अपील की है कि वे समय सीमा के भीतर अपने दस्तावेजों को अद्यतन कर लें। जिन संस्थानों ने अभी तक अपनी औपचारिकताएं पूरी नहीं की हैं, वे तत्काल संबंधित कार्यालय में अपने पूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करें ताकि उनके पंजीयन संबंधी आवेदनों का समयबद्ध निराकरण हो सके। विभाग का यह प्रयास जिले में एक सुरक्षित और जवाबदेह स्वास्थ्य परिवेश तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, ताकि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
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