US Iran Tension : मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक विस्फोटक स्थिति में पहुँच गया है। समुद्री व्यापारिक मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा को लेकर हालात बेहद गंभीर हो गए हैं, जहाँ सैकड़ों जहाज अभी भी फंसे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए कि अमेरिका ईरान के खिलाफ और अधिक सैन्य हमलों की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि “हमने बीती रात ईरान पर कड़ा प्रहार किया था और यदि आवश्यकता हुई, तो आज रात भी हम फिर से जोरदार कार्रवाई करेंगे।”
ईरान का व्यवहार बर्दाश्त नहीं: अमेरिकी राष्ट्रपति
ईरान की आक्रामक गतिविधियों पर नाराजगी जताते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने तीखे तेवर अपनाए हैं। उन्होंने ईरान के व्यवहार को अत्यधिक अनुचित करार देते हुए कहा कि अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्दोष व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन और मिसाइलों का सुनियोजित उपयोग किया है। ट्रंप का मानना है कि इन हमलों का जवाब सैन्य कार्रवाई के माध्यम से देना अमेरिका की मजबूरी बन गया है ताकि वैश्विक व्यापारिक सुरक्षा बहाल रह सके।
बातचीत का दौर खत्म, युद्धविराम के आसार नहीं
ईरान के साथ हुए समझौतों को लेकर पूछे गए एक सवाल पर ट्रंप ने दो टूक जवाब दिया कि अब ईरान के साथ कोई भी अंतरिम समझौता शेष नहीं बचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “मुझे लगता है कि युद्धविराम पूरी तरह समाप्त हो चुका है। ईरान के साथ बातचीत करना अब समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं है।” यह बयान ऐसे समय पर आया है जब कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हुए ईरानी हमलों के जवाब में जवाबी कार्रवाई की थी। ट्रंप का यह रुख यह दर्शाता है कि अमेरिका अब कूटनीतिक रास्तों के बजाय सैन्य विकल्पों को प्राथमिकता दे रहा है।
रणनीतिक ठिकानों पर हमले की अटकलें
इस तनाव के बीच, अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि अमेरिका ईरान के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘खार्ग द्वीप’ पर नियंत्रण करने या वहां हमले करने के विकल्पों पर विचार कर सकता है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो अमेरिका अपने सैन्य ठिकानों को और मजबूत कर सकता है। नाटो सम्मेलन के दौरान दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह तनाव एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल जाएगा या फिर अंतरराष्ट्रीय दबाव ईरान को अपनी आक्रामक नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगा। फिलहाल, मिडिल ईस्ट का पूरा क्षेत्र भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
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