Amit Jogi Notice : जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई अधिवक्ता बृजेशनाथ पांडेय की ओर से की गई शिकायत के बाद हुई है। शिकायत मिलने के बाद बार काउंसिल ने मामले को संज्ञान में लेते हुए अमित जोगी से उनका पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। अब इस मामले में उनका जवाब सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
कथित वीडियो विवाद में रायपुर पुलिस ने दर्ज किया मामला
अमित जोगी का नाम इन दिनों कथित ‘ज्ञानु-जानू’ वीडियो विवाद को लेकर भी चर्चा में है। इस मामले में रायपुर के सिविल लाइंस थाना पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 352, 353(2), 356(2) और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की ओर से पूछताछ के लिए अमित जोगी के निवास के बाहर नोटिस भी चस्पा किया गया है।

सूरत में मौजूदगी की तस्वीरों से शुरू हुई चर्चाएं
इस बीच सोशल मीडिया पर अमित जोगी की सूरत में मौजूदगी से जुड़ी तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक और सार्वजनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं। तस्वीरों के आधार पर उनके रायपुर से बाहर होने की बात कही जाने लगी। कुछ लोगों ने उनके फरार होने की आशंका भी जताई। हालांकि, केवल सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों के आधार पर किसी व्यक्ति के फरार होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। पुलिस की जांच और आधिकारिक जानकारी के बाद ही उनकी स्थिति को लेकर स्पष्टता आ सकती है।

क्या है ‘वोट चोरी’ वीडियो विवाद का पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत उस कथित वीडियो से हुई, जिसे अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। आरोप है कि वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर आपत्तिजनक प्रस्तुति की गई थी। यह वीडियो ‘वोट चोरी’ के मुद्दे से जुड़ा बताया गया। पोस्ट सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया और भाजपा नेताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
पोस्ट हटाकर अमित जोगी ने दी थी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने संबंधित पोस्ट को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया था। इसके बाद उन्होंने एक अन्य पोस्ट के माध्यम से सफाई भी दी। अमित जोगी ने कहा था कि जिस संदेश को वह लोगों तक पहुंचाना चाहते थे, उनके नजरिए से उसकी प्रासंगिकता अब भी बनी हुई है, लेकिन उसे प्रस्तुत करने का तरीका उचित नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि वह ऐसी मर्यादा पार नहीं करना चाहते, जो उनके विचारों और विश्वासों के अनुरूप सही न हो।

भाजपा नेताओं ने भी जताई थी कड़ी आपत्ति
वीडियो विवाद सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने अमित जोगी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की थी। राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष ने भी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने अमित जोगी के मानसिक स्वास्थ्य और कथित नशे को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए उन्हें मनोपचार केंद्र में भर्ती कराने की मांग की थी। उनकी इस टिप्पणी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा हुई।
अब बार काउंसिल के जवाब पर टिकी नजरें
एक ओर कथित वीडियो विवाद में रायपुर पुलिस की जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर स्टेट बार काउंसिल ने अमित जोगी से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। ऐसे में अब देखना होगा कि अमित जोगी नोटिस पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और बार काउंसिल आगे क्या कदम उठाती है। फिलहाल दोनों मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित संस्थाओं की कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।
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