@TheTarget365 : अब नौ घंटे नहीं हैं. आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने कर्मचारियों के दैनिक कार्य घंटों में और वृद्धि कर दी है। अब से आंध्र प्रदेश के कर्मचारियों को प्रतिदिन 10 घंटे काम करना होगा। ओवरटाइम की अधिकतम सीमा बढ़ा दी गई है। महिलाओं के लिए कार्य नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। आंध्र सरकार का कहना है कि इस नए नियम से निवेशक राज्य में अधिक सक्रिय होंगे। जैसे-जैसे निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। दूसरे शब्दों में कहें तो सरकार के इस फैसले से केवल कर्मचारियों को ही लाभ होगा। उनकी आय बढ़ेगी. लेकिन विपक्ष आंध्र प्रदेश में टीडीपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की काम के घंटे बढ़ाने के फैसले की आलोचना कर रहा है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री के पार्थसारथी ने कहा कि राज्य के श्रम कानूनों में बदलाव का फैसला लिया गया है। यह निर्णय आंध्र कैबिनेट की बैठक में लिया गया। मंत्री ने कहा, “धारा 54, जिसमें प्रतिदिन नौ घंटे की ड्यूटी का उल्लेख है, को बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया गया है।” अनुच्छेद 55 के अनुसार, कर्मचारियों को पांच घंटे काम करने के बाद एक घंटे का आराम दिया जाता था। उस समय सीमा को भी बढ़ाकर छह घंटे कर दिया गया है।” श्रम कानूनों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में कर्मचारी 75 घंटे से अधिक ‘ओवरटाइम’ नहीं कर सकते थे। राज्य सरकार ने अब उस समय सीमा को बढ़ाकर 144 घंटे कर दिया है।
यह परिवर्तन क्यों? मंत्री ने कहा, “श्रम कानूनों में इस बदलाव से हमारे राज्य में कारखानों में निवेश बढ़ेगा।” अधिक निवेशक आएंगे। इस नये नियम से वास्तव में कर्मचारियों को लाभ होगा। वैश्वीकरण सभी देशों में हो रहा है। “आंध्र प्रदेश में वैश्विक मानदंडों को लागू करने के लिए कानून में संशोधन करना आवश्यक है।”
आंध्र सरकार ने महिलाओं के लिए कार्य नियमों में भी बदलाव किया है। उस राज्य में रात्रि ड्यूटी पर कई प्रतिबंध हैं। जिसमें ढील देने का निर्णय लिया गया है। नियमों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में महिलाएं इतने लंबे समय तक रात्रि ड्यूटी नहीं कर सकती थीं। वह नियम बदल रहा है। अब से महिलाओं को रात में भी काम करने का अवसर मिलेगा। सरकार उन्हें आवश्यक सुरक्षा भी मुहैया कराएगी। इस संबंध में मंत्री ने कहा, ‘‘जब आप अतिरिक्त काम करते हैं तो आपकी आय भी बढ़ती है।’’ “इस नियम से महिलाओं की आय भी बढ़ेगी।” सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए आंध्र प्रदेश भाकपा के राज्य सचिव के रामकृष्ण ने कहा कि यह नया नियम कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है। उनके शब्दों में, “पिछले 11 वर्षों से मोदी सरकार ने बार-बार ऐसे फैसले लिए हैं जो श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं।”
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