Aparna Yadav
Aparna Yadav: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक हालिया वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है, जिसमें वह कथित तौर पर एक महिला का बुर्का खींचते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो ने पहले ही राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया था, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद की एक अमर्यादित टिप्पणी ने इस आग में घी डालने का काम किया है। निषाद के विवादित बोल और नीतीश कुमार के व्यवहार पर अब उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने सख्त तेवर अपना लिए हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए निषाद पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के मंत्री संजय निषाद ने एक ऐसा बयान दिया जिसे बेहद आपत्तिजनक माना जा रहा है। उन्होंने कहा, “नकाब (हिजाब) छू दिया तो इतना हंगामा हो गया है, कहीं कुछ और छूते तब क्या हो जाता?” संजय निषाद का यह बयान न केवल महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला माना जा रहा है, बल्कि इससे एक नए कूटनीतिक और सामाजिक विवाद ने जन्म ले लिया है। विपक्ष के साथ-साथ अब सत्ता पक्ष के भीतर से भी उनके खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं।
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। बाराबंकी के जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुँचीं अपर्णा यादव ने पत्रकारों से बातचीत में दोनों नेताओं को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में गरिमा का पालन करना अनिवार्य है। अपर्णा ने स्पष्ट किया कि किसी भी महिला के पहनावे, धर्म या जाति को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है।
महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कड़े शब्दों में कहा कि नीतीश कुमार द्वारा किया गया कृत्य और संजय निषाद द्वारा दिया गया बयान, दोनों ही समान रूप से निंदनीय हैं। उन्होंने मांग की है कि इन दोनों ही दिग्गज नेताओं को अपने व्यवहार और अपशब्दों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। अपर्णा यादव ने कहा, “किसी भी महिला की अस्मत और उसके आत्मसम्मान से खिलवाड़ करने का अधिकार किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को नहीं है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे बयानों से समाज में गलत संदेश जाता है।
अपर्णा यादव ने नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि सत्ता और पद की जिम्मेदारी केवल शासन करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज के प्रति एक आदर्श व्यवहार प्रस्तुत करना भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब रक्षक ही भक्षक जैसी भाषा बोलने लगें या महिलाओं के साथ अमर्यादित व्यवहार करें, तो आम जनता में असुरक्षा का भाव पैदा होता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि एक गलत बयान किसी की धार्मिक या व्यक्तिगत भावनाओं को गहरी चोट पहुँचा सकता है।
महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने अंत में स्पष्ट किया कि आयोग महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चाहे कोई कितना भी बड़ा राजनेता क्यों न हो, महिलाओं के सम्मान के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपर्णा यादव के इस कड़े रुख के बाद अब भाजपा और उसके सहयोगी दलों के बीच आंतरिक खींचतान बढ़ने के आसार दिख रहे हैं। देखना यह होगा कि क्या नीतीश कुमार और संजय निषाद इस बढ़ते दबाव के बाद माफी मांगते हैं या नहीं।
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