CAA Assam News: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि असम में CAA का कोई विशेष महत्व नहीं है, क्योंकि राज्य के बंगाली हिंदू खुद को पहले से ही भारतीय नागरिक मानते हैं और उन्होंने इस कानून के तहत आवेदन नहीं किया है।

सरमा ने साफ किया कि बंगाली हिंदुओं को विदेशी मानने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि वे 1971 से पहले ही भारत आ चुके थे। उन्होंने कहा कि “इंदिरा गांधी उन्हें 1971 में लेकर आई थीं और कभी नहीं कहा गया कि उन्हें वापस भेजा जाएगा।”

CAA और नए नियम
CAA के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को 31 दिसंबर 2014 तक भारत में आने पर नागरिकता देने का प्रावधान है। हाल ही में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (एक्सेम्प्शन) ऑर्डर, 2025 लागू किया गया है, जिसके अनुसार ये लोग 31 दिसंबर 2024 तक भारत में बिना वैध दस्तावेजों के रह सकते हैं।
हालांकि, असम में अभी तक इस अधिनियम के तहत कोई नया आवेदन नहीं आया है। सरमा का कहना है, “अगर लाखों आवेदन आते हैं तो हम विचार करेंगे, लेकिन फिलहाल असम में यह मुद्दा महत्वहीन है।”
AASU और विपक्ष ने जताया विरोध
CAA को लेकर ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) और विपक्षी दलों ने फिर से विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह असम समझौते के साथ धोखा है। असम अकॉर्ड में तय किया गया था कि 25 मार्च 1971 तक राज्य में आए लोगों को ही स्वीकार किया जाएगा, जबकि CAA और नए आदेशों ने इस तारीख को 31 दिसंबर 2024 तक बढ़ा दिया है।
AASU ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हिंदू बंगालियों को नागरिकता देकर असम की सामाजिक संरचना से खिलवाड़ कर रही है। 2019 में CAA विरोधी आंदोलन के दौरान 5 लोगों की मौत भी हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट की मुहर
अक्टूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने सिटिजनशिप एक्ट की धारा 6A को वैध ठहराया। यह धारा 1985 के असम समझौते के तहत बनाई गई थी, जिसमें 1 जनवरी 1966 से 25 मार्च 1971 के बीच आए बांग्लादेशी नागरिकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया। चार जजों की सहमति से यह धारा बरकरार रखी गई, जबकि जस्टिस जेबी पारदीवाला ने असहमति जताई। असम में CAA पर अब भी बहस जारी है, लेकिन मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक, राज्य के बंगाली हिंदू खुद को भारतीय मानते हैं और उन्हें CAA की जरूरत नहीं। वहीं, AASU और विपक्ष इसे असम के साथ धोखा मान रहे हैं।
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