Assam Flood 2026: असम में लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्य के कई हिस्सों में जलभराव और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। मंगलवार को शिवसागर जिले से सात और लोगों की डूबने से मौत की पुष्टि हुई, जिसके बाद राज्य में बाढ़ और इससे जुड़े हादसों में जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर 75 हो गई है। बढ़ते संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

सात जिलों में सबसे ज्यादा तबाही
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल सात जिले बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हैं। इनमें शिवसागर, चराईदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, सोनितपुर और कामरूप (मेट्रो) शामिल हैं। इन जिलों के 21 राजस्व सर्किलों के अंतर्गत आने वाले 622 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। अनुमानित 3.32 लाख से अधिक लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं और हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

खेती को भारी नुकसान, हजारों हेक्टेयर फसल जलमग्न
बाढ़ का सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 45,341 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब चुकी है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। कई इलाकों में धान और अन्य फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। वहीं नुमालीगढ़ क्षेत्र में धनसिरी नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अब तक किसी नदी ने अपने ऐतिहासिक उच्चतम जलस्तर को पार नहीं किया है, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने घोषित किया विशेष राहत पैकेज
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है। सरकार ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को कुल 9 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। इसमें 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि के साथ मुख्यमंत्री राहत कोष से अतिरिक्त 5 लाख रुपये शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, जो लोग 30 दिनों से अधिक समय से लापता हैं, उनके परिवारों को भी 4 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी।
प्रभावित परिवारों को नकद सहायता
राज्य सरकार ने बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित एक लाख से अधिक परिवारों को तत्काल राहत देने का फैसला किया है। इन परिवारों को आवश्यक घरेलू जरूरतों की पूर्ति के लिए 15,000 रुपये की नकद सहायता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि राहत राशि के माध्यम से प्रभावित परिवार अपने दैनिक जीवन की आवश्यक वस्तुएं खरीद सकें और प्रारंभिक कठिनाइयों से उबर सकें।
‘ओरुणोदोई’ योजना के तहत मिलेगी अतिरिक्त मदद
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की लोकप्रिय ‘ओरुणोदोई’ योजना को 1 अगस्त से दोबारा लागू किया जाएगा। बाढ़ प्रभावित जिलों के लाभार्थियों को इस महीने विशेष राहत के रूप में 2,500 रुपये की अतिरिक्त किस्त दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिलेगी और वे आपदा के बाद अपनी आवश्यक जरूरतें पूरी कर सकेंगे।
छात्रों के लिए शिक्षा सहायता की घोषणा
बाढ़ के कारण पढ़ाई प्रभावित होने वाले विद्यार्थियों के लिए भी सरकार ने विशेष सहायता योजना की घोषणा की है। 1 अगस्त से बाढ़ प्रभावित जिलों के छात्रों को पुस्तक सहायता दी जाएगी। हायर सेकेंडरी स्तर के विद्यार्थियों को 1,000 रुपये तथा स्नातकोत्तर छात्रों को 5,000 रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा पाठ्यक्रम की किताबें निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी और स्कूल यूनिफॉर्म खरीदने के लिए भी आर्थिक सहयोग दिया जाएगा।
खोए दस्तावेज दोबारा होंगे जारी
बाढ़ के दौरान जिन विद्यार्थियों की 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, प्रमाण पत्र या अन्य शैक्षणिक दस्तावेज नष्ट या गुम हो गए हैं, उन्हें भी बड़ी राहत दी गई है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि ऐसे सभी प्रमाण पत्र और अंकसूचियां बिना किसी शुल्क के दोबारा जारी की जाएंगी। सरकार का कहना है कि राहत और पुनर्वास के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को जल्द सामान्य करना भी उसकी प्राथमिकता है।
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