Azam Khan Supreme Court : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। सोमवार को आजम खान के वकील निजाम पाशा ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने मामला उठाया और जल्द सुनवाई की मांग की। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने याचिका को इसी सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
रिहाई के 40 मिनट बाद गिरफ्तारी को बताया चुनौती का आधार
आजम खान ने अपनी याचिका में 31 अक्टूबर को हुई गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 29 अक्टूबर को दोहरे पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के बाद वह रामपुर जेल से बाहर आए थे, लेकिन करीब 40 मिनट बाद ही ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। याचिका में इस कार्रवाई को चुनौती देने के साथ गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत के उस आदेश को भी रद्द करने की मांग की गई है, जिसमें उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई गिरफ्तारी
ईडी ने आजम खान को रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया है। यह मामला मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ा है, जिसके संस्थापक आजम खान हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी निर्माण कार्यों के ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों ने ठेकों से मिली रकम का एक हिस्सा यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाया। बाद में इसी धन को ट्रस्ट को दान के रूप में दिए जाने का आरोप है।

सरकारी धन और जमीन के इस्तेमाल पर ईडी ने लगाए गंभीर आरोप
ईडी के मुताबिक, सरकारी धन का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में निर्माण कार्य कराने के लिए किया गया। इसमें विधायक और विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से कराए गए लगभग 6.60 करोड़ रुपये के कार्य भी शामिल हैं। इसके अलावा रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर में किसानों की कृषि भूमि कथित तौर पर जबरन यूनिवर्सिटी के लिए लेने के आरोप लगाए गए हैं।
जांच एजेंसी ने 34 एकड़ में फैले 45 शत्रु संपत्ति भूखंडों पर अवैध कब्जे का आरोप भी जांच में शामिल किया है। हालांकि, ये सभी आरोप हैं, जिन पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचार होना बाकी है।

426 करोड़ की संपत्ति को अपराध से अर्जित बताने का दावा
ईडी ने जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों में से 426.46 करोड़ रुपये की संपत्ति को कथित अपराध से अर्जित संपत्ति माना है। एजेंसी के आकलन के अनुसार, इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 1,170 करोड़ रुपये है। ईडी ने 28 अक्टूबर को इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था। इससे पहले 13 अक्टूबर को जांच एजेंसी ने रामपुर जेल में आजम खान से पूछताछ भी की थी।
दोहरे पैन कार्ड मामले में मिली जमानत के बाद फिर पहुंचे जेल
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दोहरे पैन कार्ड मामले में 29 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली थी। अदालत ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की थी। इसके बाद 31 अक्टूबर को आजम खान रामपुर जेल से रिहा हुए, लेकिन कुछ ही देर बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। एक नवंबर को उन्हें गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत का आदेश जारी हुआ।
348 दिन जेल में रहने के बाद मिली थी राहत
दोहरे पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम को 17 नवंबर 2025 को सात-सात साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद दोनों को रामपुर जिला जेल भेज दिया गया था। सजा के खिलाफ दाखिल अपील 20 अप्रैल 2026 को सेशन कोर्ट ने खारिज कर दी थी। इसके बाद दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। 29 अक्टूबर को जमानत मिलने तक दोनों करीब 348 दिन जेल में रहे।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आजम खान की याचिका में ईडी की गिरफ्तारी की वैधता और न्यायिक हिरासत के आदेश को चुनौती दी गई है। अदालत में उनकी दलीलों पर सुनवाई के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल यह देखना अहम होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और आजम खान को कोई राहत मिलती है या नहीं।


