Bangladesh News: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने देश के सभी मीडिया संस्थानों के लिए नया निर्देश जारी करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के किसी भी बयान, भाषण या संदेश के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाने को कहा है। यह निर्देश टीवी चैनलों, रेडियो, समाचार पत्रों, ऑनलाइन पोर्टलों और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म सहित सभी मीडिया संस्थानों पर लागू होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अदालत के आदेशों की अनदेखी या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वाले मीडिया संस्थानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल के आदेश का हवाला
सरकार ने अपने निर्देश में बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) के आदेश का उल्लेख किया है। ट्रिब्यूनल ने जुलाई और अगस्त में हुए जन-आंदोलन के दौरान मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को दोषी ठहराए जाने और उन्हें भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद उनके सार्वजनिक बयानों और भाषणों के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया था। यह प्रतिबंध पारंपरिक मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लागू बताया गया है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से पुराने भाषण हटाने के निर्देश
ट्रिब्यूनल ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) विभाग और बांग्लादेश दूरसंचार नियामक आयोग (BTRC) को निर्देश दिया है कि वे शेख हसीना के भाषणों और बयानों के प्रसारण पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करें। इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध उनके उन पुराने भाषणों और वीडियो को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं, जिन्हें अधिकारियों ने विवादित या घृणास्पद भाषणों की श्रेणी में रखा है।
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी ने भी जारी की अपील
बांग्लादेश की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी (NCSA) ने भी मीडिया संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालकों से अदालत के आदेशों का पालन करने की अपील की है। एजेंसी का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लागू कानूनों को ध्यान में रखते हुए ऐसे किसी भी कंटेंट का प्रसारण या प्रसार नहीं किया जाना चाहिए, जो न्यायालय के निर्देशों के विपरीत हो। एजेंसी ने सभी मीडिया संगठनों से जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ कार्य करने का आग्रह किया है।
अदालती अवमानना और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
सरकार ने कहा है कि किसी ऐसे व्यक्ति के बयान या भाषण का प्रसारण, जिसे अदालत ने दोषी ठहराया हो और भगोड़ा घोषित किया हो, राष्ट्रीय कानूनों और अदालत की अवमानना के दायरे में आ सकता है। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार की सामग्री देश की आंतरिक शांति, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए अदालत के आदेशों का पालन करना सभी मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी है।

सरकार ने कुछ मीडिया संस्थानों पर जताई चिंता
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ मीडिया संस्थान अब भी शेख हसीना के बयानों को प्रसारित या प्रकाशित कर रहे हैं। सरकार ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना उचित नहीं है और सभी मीडिया संगठनों को कानूनी प्रावधानों का पालन करना चाहिए।
जन-आंदोलन और राष्ट्रीय हित का किया उल्लेख
सरकार ने अपने बयान में जुलाई के जन-आंदोलन का भी उल्लेख किया और कहा कि उस दौरान हुई घटनाओं तथा उसमें जान गंवाने वाले लोगों के सम्मान को बनाए रखना आवश्यक है। सरकार के अनुसार, मीडिया संस्थानों को समाचार प्रसारण के दौरान राष्ट्रीय हित, न्यायालय के निर्देशों और कानूनी दायित्वों का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
मीडिया से जिम्मेदारी निभाने की अपील
अंतरिम सरकार ने सभी मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे समाचारों के प्रकाशन और प्रसारण में जिम्मेदार पत्रकारिता का पालन करें। सरकार का कहना है कि अदालत के आदेशों का सम्मान करना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना प्रत्येक मीडिया संगठन की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि किसी संस्थान द्वारा इन निर्देशों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
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