Bhupender Yadav : केंद्र सरकार के मंत्रालयों में एक बड़ी प्रशासनिक हलचल के तहत केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय में कार्यरत तीन महत्वपूर्ण अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है। 3 जुलाई को जारी एक आधिकारिक आदेश के माध्यम से मंत्री के निजी सचिव (PS) और दो अतिरिक्त निजी सचिवों (APS) की सेवाएं समाप्त कर दी गईं या उन्हें उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया। हालांकि सरकार या मंत्रालय की ओर से इन अधिकारियों को हटाने के पीछे की ठोस वजहों का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन इस कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

कौन हैं हटाए गए अधिकारी और उनका कार्यकाल?
हटाए गए अधिकारियों में सबसे प्रमुख नाम अमर सिंह का है, जो 2010 बैच के आईआरएस-आईटी (IRS-IT) अधिकारी हैं। अमर सिंह पिछले पांच वर्षों से भूपेंद्र यादव के साथ जुड़े हुए थे। जब यादव 2021 से 2024 तक श्रम और रोजगार मंत्री थे, तब भी अमर सिंह उनके निजी सचिव के रूप में कार्यरत थे। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद जब भूपेंद्र यादव ने पर्यावरण मंत्रालय संभाला, तब भी अमर सिंह को पुन: इसी पद पर नियुक्त किया गया था। अब प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए उन्हें उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया है।

अन्य अधिकारियों पर भी गिरी गाज
इस आदेश के दायरे में केंद्रीय सचिवालय सेवा (CSS) के अतिरिक्त निजी सचिव शैलेश कुमार सिंह भी आए हैं। उन्हें भी समय से पहले उनके मूल विभाग (कैडर) में वापस भेजने का निर्देश दिया गया है। वहीं, तीसरे अधिकारी आयुष शरण, जो अतिरिक्त निजी सचिव के पद पर तैनात थे, उनकी सेवाएं ‘तत्काल प्रभाव से’ समाप्त कर दी गई हैं। सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी इन आदेशों की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तथा अन्य संबंधित मंत्रालयों को भेज दी गई हैं। इन अधिकारियों की अचानक विदाई के बाद से मंत्रालय के कामकाज और भविष्य की नियुक्तियों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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भूपेंद्र यादव का राजनीतिक कद और महत्व
भूपेंद्र यादव भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता हैं। वर्तमान में वे राजस्थान की लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्होंने श्रम और रोजगार मंत्रालय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बखूबी संभाली थी। इसके अलावा, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उन्होंने संगठन में लंबी भूमिका निभाई है और उन्हें पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में गिना जाता है। ऐसे दिग्गज मंत्री के कार्यालय में हुई यह उच्च-स्तरीय छंटनी किसी बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।
कार्रवाई की वजहों पर सस्पेंस बरकरार
भले ही आदेश में ‘प्रशासनिक कारणों’ का जिक्र किया गया हो, लेकिन इतने महत्वपूर्ण अधिकारियों को एक साथ हटाए जाने की घटना ने कई अटकलों को जन्म दिया है। क्या यह किसी आंतरिक जांच का परिणाम है या फिर कार्यप्रणाली में बदलाव के लिए उठाया गया कदम है, इसका उत्तर अभी मिलना बाकी है। फिलहाल मंत्रालय और पीएमओ की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। आने वाले समय में स्पष्ट होगा कि मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय में यह बड़ा फेरबदल किन परिस्थितियों में और क्यों किया गया है।











