E Malkhana System : रायपुर कमिश्नरेट के अंतर्गत पुलिसिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सोमवार को गुढ़ियारी थाने में रायपुर कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला और एडिशनल कमिश्नर अमित तुकाराम कांबले ने ‘ई-मालखाना प्रणाली’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस डिजिटल प्रणाली का मुख्य उद्देश्य थानों में जब्त की गई सामग्रियों के रखरखाव और प्रबंधन को पारदर्शी व वैज्ञानिक बनाना है। कोतवाली थाने में सफल शुरुआत के बाद, अब गुढ़ियारी थाना इस उन्नत तकनीक को अपनाने वाला कमिश्नरेट का दूसरा थाना बन गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में रायपुर के शेष 19 थानों में भी इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

बारकोड और डिजिटल ट्रैकिंग से बढ़ेगी कार्यक्षमता
ई-मालखाना प्रणाली की कार्यप्रणाली बेहद सरल और प्रभावी है। इस नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक जब्त सामग्री का सॉफ्टवेयर आधारित डिजिटल पंजीयन किया जा रहा है। सामग्रियों को उनकी श्रेणी (A1, A2, B1, B2) के अनुसार रैकवाइज वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित किया गया है, ताकि हर वस्तु का रिकॉर्ड और उसकी सटीक लोकेशन पल भर में मिल सके। इसके अलावा, जब्त किए गए हर सामान पर बारकोड लगाए गए हैं, जिससे उनकी पहचान और ट्रैकिंग करना अत्यंत सुगम हो गया है। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने प्रणाली का डेमो देखा और इसके क्रियान्वयन की बारीकियों को विस्तार से समझा।

केस प्रॉपर्टी की तलाश में अब नहीं लगेगा समय
एडिशनल कमिश्नर अमित तुकाराम कांबले के अनुसार, यह प्रोजेक्ट केस प्रॉपर्टी के प्रभावी प्रबंधन के लिए मील का पत्थर साबित होगा। पहले किसी पुराने मामले से जुड़ी सामग्री को कोर्ट में पेश करने के लिए उसे ढूंढने में घंटों मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन अब डिजिटल सिस्टम की मदद से कोई भी प्रॉपर्टी तुरंत ट्रेस की जा सकेगी। यह न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि पुलिस कार्यप्रणाली में सटीकता भी लाएगा। नॉर्थ जोन के डीसीपी मयंक गुर्जर ने बताया कि सीबीआई मॉडल से प्रेरित यह प्रणाली पुलिस स्टेशन के मैनेजमेंट को उच्च स्तर पर ले जाने में सहायक होगी, जिससे माल मुंशी और थाना प्रभारियों के बीच चार्ज ट्रांसफर की प्रक्रिया भी पारदर्शी हो जाएगी।

पारदर्शी प्रबंधन और सुरक्षा का नया आयाम
गुढ़ियारी थाने में इस प्रणाली को लागू करने से पहले पूरे मालखाने का भौतिक सत्यापन किया गया था। इस नई व्यवस्था से जब्त माल की आवक-जावक और हैंडलिंग की डिजिटल ट्रैकिंग संभव हो गई है, जिससे ‘चेन ऑफ कस्टडी’ (सामान की कस्टडी का सिलसिला) अधिक सुरक्षित और सुदृढ़ हो गई है। यह कदम पुलिस विभाग की कार्यशैली में जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ ही साक्ष्यों के सुरक्षित रखरखाव को भी प्राथमिकता देता है। थाना प्रभारी और मालखाना मुहर्रिर के संयुक्त प्रयासों से विकसित यह मॉडल भविष्य में अन्य थानों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। अब रायपुर पुलिस का लक्ष्य अपने सभी थानों को पूरी तरह से डिजिटल और हाई-टेक बनाने का है ताकि आम जनता और न्यायपालिका को त्वरित सेवाएं दी जा सकें।











