Sukma development news : राज्य में विकास की गति को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बड़ी उपलब्धि को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि पूवर्ती और सिलगेर के बीच बनाए गए लोहे के पुल से अब स्थानीय लोगों को आने-जाने में बड़ी सुविधा हो रही है। इससे क्षेत्र में न केवल आवागमन सुलभ हुआ है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिली है। मुख्यमंत्री साय ने कहा, “20 महीने की हमारी सरकार के यह प्रयास अब जमीनी स्तर पर नजर आ रहे हैं। पूवर्ती और सिलगेर जैसे सुदूर इलाकों को जोड़ने वाला यह पुल सिर्फ लोहे का नहीं, बल्कि विकास और विश्वास की मजबूत कड़ी है।”

आवागमन में सुधार से ग्रामीणों को राहत
छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर क्षेत्र के इन गांवों को लंबे समय से मूलभूत ढांचे की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। खासकर बारिश के मौसम में पुल या सड़क के अभाव में इन गांवों का संपर्क पूरी तरह कट जाया करता था। अब लोहे के इस पुल के निर्माण से स्कूली बच्चों, किसानों, मरीजों और व्यापारियों को विशेष राहत मिली है।

सुरक्षा और विकास, दोनों को प्राथमिकता
सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार का यह कदम विकास और विश्वास बहाली की दिशा में एक मजबूत संकेत माना जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के साथ-साथ विकास उनकी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। पुल निर्माण जैसे प्रोजेक्ट इस सोच का प्रमाण हैं।
20 महीने में दिखने लगा है असर
मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते 20 महीनों में राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे को लेकर कई योजनाएं शुरू की हैं। ग्रामीण संपर्क मार्ग, पुल-पुलिया, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। पूवर्ती-सिलगेर पुल उसी नीति का हिस्सा है।पुल के निर्माण से खुश स्थानीय ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और प्रशासन का आभार जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब बाजार, स्कूल, अस्पताल और प्रशासनिक कार्यालय तक पहुंचना पहले से कहीं आसान हो गया है। पूवर्ती और सिलगेर के बीच लोहे का पुल केवल दो गांवों को नहीं जोड़ता, बल्कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की जन-हितैषी सोच और विकास नीति का जीवंत उदाहरण है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब दूर-दराज के इलाकों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में सफल हो रहा है।











