Aadhar accepted in SIR : आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश जारी करते हुए चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए अब ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी दी जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने आधार कार्ड सहित 11 वैकल्पिक दस्तावेजों को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का आदेश दिया है। यह निर्देश राज्य में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के संबंध में आया है।

अब केवल फिजिकल आवेदन की बाध्यता नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फॉर्म-6 को अब केवल फिजिकली जमा करने की अनिवार्यता खत्म कर दी जाए। इसके स्थान पर चुनाव आयोग ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराए, जिससे लाखों लोगों को आसानी से वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का अवसर मिले। कोर्ट ने यह कदम मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया है।

कौन-कौन से दस्तावेज होंगे मान्य?
कोर्ट ने साफ किया कि फॉर्म-6 के साथ किसी भी मान्य दस्तावेज को लगाया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं:
आधार कार्ड
ड्राइविंग लाइसेंस
पासबुक
राशन कार्ड
पानी/बिजली का बिल
जन्म प्रमाण पत्र
और अन्य कुल 11 प्रकार के दस्तावेज
अब ये सभी दस्तावेज पहचान और निवास प्रमाण के तौर पर मान्य होंगे, जिससे उन नागरिकों को राहत मिलेगी जिनके पास वोटर ID या विशेष दस्तावेज नहीं हैं।
कोर्ट ने राजनीतिक दलों को लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि “राजनीतिक दलों की निष्क्रियता हैरान करने वाली है।” राज्य की 12 पंजीकृत पार्टियों में से सिर्फ 3 ही सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में शामिल हुईं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि “1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट्स के बावजूद केवल दो आपत्तियां आई हैं, तो बाकी पार्टियां क्या कर रही हैं?”
कोर्ट ने राजनीतिक दलों से कहा कि वे इस मुद्दे पर चुप्पी साधने के बजाय आगे आएं और मतदाताओं की मदद करें।
आयोग पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकीलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने चुनाव आयोग का पक्ष रखते हुए कहा कि “इस प्रक्रिया को लेकर कोई पूर्वाग्रह नहीं है और आयोग निष्पक्षता से काम कर रहा है।”
वहीं, अधिवक्ता करुणा नंदी और प्रशांत भूषण ने कहा कि SIR प्रक्रिया को लेकर ज़मीनी स्तर पर भारी भ्रम है।
अधिवक्ता गौतम भटनागर ने चिंता जताई कि “7.24 करोड़ मतदाताओं में से 12% को ‘नॉट रिकमेंडेड’ कहा गया है, ऐसे में हर दिन 36 हजार फॉर्म की जांच करना असंभव होगा।”
8 सितंबर को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यह मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और इसपर 8 सितंबर 2025 को अगली सुनवाई होगी। कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्थति की स्पष्ट जानकारी पेश करने और मतदाता सूची की शुद्धता व समावेशिता सुनिश्चित करने को कहा है।
क्या होगा असर?
डिजिटल सुविधा के आने से वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की प्रक्रिया आसान होगी
प्रवासी मजदूर, ग्रामीण और युवा वर्ग को विशेष लाभ मिलेगा
आधार कार्ड को मान्यता मिलने से दस्तावेजों की जटिलता कम होगी
राजनीतिक दलों पर अब मतदाता जागरूकता अभियान चलाने की नैतिक जिम्मेदारी होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से बिहार में लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ेगी और वोटर लिस्ट की पारदर्शिता व समावेशिता सुनिश्चित होगी। साथ ही यह आदेश यह भी याद दिलाता है कि राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग दोनों की जिम्मेदारी है कि वे मतदाताओं को जागरूक करें और सुविधा प्रदान करें।
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