BJP New President 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल होने की संभावना है। पार्टी चाहती है कि यह चुनाव मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा के बजाय एक नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में लड़ा जाए। नड्डा को पहले ही दो बार कार्यकाल विस्तार मिल चुका है। अब भाजपा नेतृत्व नए चेहरे पर दांव लगाने की तैयारी में है।

अध्यक्ष चयन में देरी क्यों?
रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा में नए अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी तीन मुख्य कारणों से हो रही है: RSS और भाजपा नेताओं से राय-मशविरा – अब तक 100 से अधिक वरिष्ठ नेताओं से राय ली जा चुकी है। इनमें पूर्व अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और संवैधानिक पदों पर रहे नेता शामिल हैं।

उपराष्ट्रपति चुनाव पर फोकस – हाल ही में जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव होना है। भाजपा चाहती है कि उसके उम्मीदवार, महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन, को बड़ी जीत मिले।
राज्यों में अध्यक्ष चुनाव अधूरे – पार्टी संविधान के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी संभव है जब कम से कम 19 राज्य इकाइयों में निर्वाचित अध्यक्ष हों। अभी यूपी, गुजरात और कर्नाटक समेत 7 राज्यों में चुनाव बाकी हैं।
बिहार चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की योजना
भाजपा का लक्ष्य बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करना है। पार्टी चाहती है कि नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव से पहले संगठन को मजबूती दे और कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करे।

कार्यकर्ताओं की नाराजगी और नया फॉर्मूला
पार्टी में लंबे समय से यह नाराजगी रही है कि दूसरे दलों से आए नेताओं को बड़े पद दिए जाते हैं, जबकि पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होती है। इसे दूर करने के लिए भाजपा ने नया फॉर्मूला निकाला है:
मंडल अध्यक्ष की उम्र 40 साल से कम होगी।
जिला और राज्य अध्यक्ष वही बनेगा, जो कम से कम 10 साल से पार्टी का सक्रिय सदस्य हो।
BJP अध्यक्ष की दौड़ में 8 नाम
भाजपा अध्यक्ष पद के लिए आठ बड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं।
1. शिवराज सिंह चौहान
6 बार सांसद और 4 बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनकी लाडली बहना योजना विधानसभा चुनाव में गेमचेंजर रही। OBC कैटेगरी से आते हैं और RSS से गहरा जुड़ाव रखते हैं।
2. सुनील बंसल
उत्तर प्रदेश में भाजपा को मजबूत बनाने वाले संगठनकर्ता। ओडिशा, बंगाल और तेलंगाना के प्रभारी रहते हुए भी सफलता दिलाई। इन्हें “यूपी का चाणक्य” कहा जाता है।
3. धर्मेंद्र प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री, अनुभवी संगठनकर्ता और बड़े OBC नेता। ओडिशा से आते हैं और मोदी-शाह की टीम में भरोसेमंद माने जाते हैं।
4. रघुवर दास
झारखंड के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री। उनकी वजह से भाजपा को पूर्वोत्तर और आदिवासी बहुल इलाकों में विस्तार मिला। OBC समुदाय से आते हैं।
5. स्मृति ईरानी
केंद्रीय मंत्री, प्रभावी वक्ता और महिला नेता। RSS से अच्छे संबंध और हिंदी बेल्ट से लेकर दक्षिण भारत तक प्रभाव।
6. वानति श्रीनिवासन
भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष। 1993 से पार्टी से जुड़ी हुईं। कोयंबटूर दक्षिण से कमल हासन को हराया। तमिलनाडु में भाजपा की जमीनी पकड़ मजबूत की।
7. तमिलिसाई सौंदर्यराजन
तमिलनाडु भाजपा की पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा राज्यपाल। मोदी-शाह की करीबी मानी जाती हैं। संगठनात्मक मजबूती के लिए दक्षिण भारत में अहम योगदान।
8. डी. पुरंदेश्वरी
पूर्व मुख्यमंत्री एन.टी. रामाराव की बेटी और आंध्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष। कांग्रेस छोड़कर भाजपा से जुड़ीं। दक्षिण भारत में पार्टी की पकड़ मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं।
आगे की राह
भाजपा का फोकस अब उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद नए अध्यक्ष के चयन पर होगा। पार्टी चाहती है कि सितंबर से पहले नया अध्यक्ष पदभार संभाल ले ताकि बिहार चुनाव में संगठनात्मक ऊर्जा और नेतृत्व दोनों नए सिरे से मिल सकें।
Read More : Gwalior Chambal : ग्वालियर चंबल अंचल बना फर्जी प्रमाण पत्रों का हब, सरकारी नौकरियों में भी हुई बड़ी धांधली











