Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव (2025) से पहले राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। महागठबंधन में शामिल नहीं किए जाने के बाद, एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने दलित और ओबीसी केंद्रित दो छोटे दलों के साथ मिलकर ‘तीसरे मोर्चे’ का गठन किया है। इस नए गठबंधन को ‘ग्रैंड डेमोक्रेटिक एलायंस’ (Grand Democratic Alliance – GDA) नाम दिया गया है।

इस गठबंधन में असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM), दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की पार्टी ‘आजाद समाज पार्टी (Kanshi Ram)’ और उत्तर प्रदेश के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी ‘अपनी जनता पार्टी’ शामिल हैं।

सीटों का बंटवारा और मोर्चे की संरचना
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने बुधवार (15 अक्टूबर, 2025) को किशनगंज में आयोजित पत्रकार वार्ता में गठबंधन की सीटों के बंटवारे की घोषणा की। यह गठबंधन सीमित सीटों पर चुनाव लड़ेगा, जहां इन दलों का पहले से जनाधार रहा है।
पार्टी का नाम चुनाव लड़ने वाली सीटें
एआईएमआईएम (AIMIM) 35
आजाद समाज पार्टी (ASP) 25
अपनी जनता पार्टी 4
कुल सीटें 64
अख्तरुल ईमान ने स्पष्ट किया कि यह सीटों का बंटवारा लिखित तौर पर तय हो गया है और घटक दलों की आपसी सहमति के बिना इसे बढ़ाया या घटाया नहीं जाएगा।
‘इंस्टाफ कायम करना असली लड़ाई’
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने अपने बयान में कहा कि उनकी ‘असली लड़ाई सत्ता प्राप्ति नहीं है, बल्कि देश में इंसाफ कायम करना है।’ यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि यह गठबंधन बिहार के दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ेगा।
उम्मीदवारों की घोषणा जल्द
प्रत्याशियों की घोषणा को लेकर पूछे गए सवाल पर अख्तरुल ईमान ने बताया कि नामांकन की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर है और उम्मीदवारों के नाम का चयन हो चुका है। उन्होंने कहा कि पार्टी की बैठक के बाद गुरुवार (16 अक्टूबर) देर शाम तक उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा। पत्रकार वार्ता के दौरान आजाद समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जौहर आजाद और अन्य प्रमुख नेता भी मौजूद थे।
चुनावी समीकरण पर असर
‘ग्रैंड डेमोक्रेटिक एलायंस’ का गठन बिहार के चुनावी समीकरणों को जटिल बना सकता है। सीमित सीटों पर ही सही, लेकिन यह गठबंधन खासकर सीमांचल, मिथिलांचल और उन क्षेत्रों में, जहां मुस्लिम और दलित मतदाताओं की संख्या अधिक है, महागठबंधन (राजद, कांग्रेस) और एनडीए (भाजपा, जदयू) दोनों के वोट बैंक में सेंध लगा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी, चंद्रशेखर आजाद और स्वामी प्रसाद मौर्य के आने से अल्पसंख्यक और दलित वोट एक नए विकल्प की ओर आकर्षित हो सकते हैं, जिससे अन्य दलों को चुनाव में सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह नया गठबंधन बिहार की राजनीति में क्या रंग लाता है।
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