Bihar Power Shift
Bihar Power Shift: बिहार की सियासत में एक युग का अंत और नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद अब राज्य में नई सरकार के गठन की हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के झंझारपुर से सांसद रामप्रीत मंडल ने शनिवार को एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बिहार सरकार का नया ‘पावर फॉर्मूला’ साझा किया है। मंडल के अनुसार, यह लगभग तय हो चुका है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी (BJP) से होगा। नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद अब बिहार एनडीए में नेतृत्व परिवर्तन की पटकथा पूरी तरह लिखी जा चुकी है।
सांसद रामप्रीत मंडल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि नई सरकार में पदों का बंटवारा मौजूदा व्यवस्था के उलट होगा। अभी तक जदयू का मुख्यमंत्री और भाजपा के दो उपमुख्यमंत्री थे, लेकिन अब भाजपा का मुख्यमंत्री होगा और जदयू को दो उपमुख्यमंत्री पद दिए जाएंगे। इसमें सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम उपमुख्यमंत्री पद के लिए करीब-करीब फाइनल माना जा रहा है। निशांत की सक्रिय राजनीति में यह एंट्री बिहार की राजनीति में ‘उत्तराधिकारी’ की बहस को नया मोड़ देने वाली है। पार्टी के भीतर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की मांग लंबे समय से उठ रही थी।
नीतीश कुमार शुक्रवार को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले चुके हैं और अब वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार जल्द ही एनडीए विधानमंडल दल की एक औपचारिक बैठक बुलाएंगे। इस बैठक में वे अपने इस्तीफे की आधिकारिक घोषणा करेंगे और गठबंधन के सभी विधायकों का आभार व्यक्त करेंगे। इसके तुरंत बाद वे राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप देंगे। नीतीश के इस्तीफे के साथ ही वर्तमान सरकार भंग हो जाएगी और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगी।
बिहार की नई एनडीए सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 15 अप्रैल को होने की प्रबल संभावना है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका सस्पेंस अभी बरकरार है, लेकिन रेस में कई बड़े नाम शामिल हैं। वर्तमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम इस लिस्ट में सबसे ऊपर चल रहा है। उनके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, दिलीप जायसवाल, संजीव चौरसिया और संजय जायसवाल के नामों की भी चर्चा जोरों पर है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 15 अप्रैल से पहले भाजपा आलाकमान दिल्ली से मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगा देगा।
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार, जो अब तक लाइमलाइट से दूर रहते थे, अचानक बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। मात्र एक महीने पहले ही उन्होंने जदयू की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की थी। पिता के राज्यसभा जाने के बाद निशांत पार्टी के कार्यों में काफी सक्रिय दिखे हैं। उन्होंने न केवल वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें की हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लिया है। जदयू के कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग उन्हें ‘भावी मुख्यमंत्री’ के रूप में देख रहा था, लेकिन फिलहाल उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाकर पार्टी के भविष्य की कमान सौंपने की तैयारी है।
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