Women Reservation Bill
Women Reservation Bill : केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून में सुधारों को लेकर बुलाए गए तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन लोकसभा में तीन प्रमुख विधेयक पेश किए। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ सदन के पटल पर रखा। इसके साथ ही गृह मंत्री अमित शाह ने ‘केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026’ पेश किया। जहाँ सत्ता पक्ष ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, वहीं कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके सहित कई विपक्षी दलों ने इन बिलों की टाइमिंग और प्रावधानों पर कड़ा विरोध जताया।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने चर्चा के दौरान भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सपा महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन भाजपा इसे केवल चुनावी नारा बनाना चाहती है। उन्होंने कड़ा प्रहार करते हुए पूछा कि भाजपा के शासन वाले 21 राज्यों में कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं? अखिलेश ने तर्क दिया कि जो संगठन महिलाओं को अपने आंतरिक ढांचे में पर्याप्त स्थान नहीं देता, वह उनके मान-सम्मान की बात कैसे कर सकता है। उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री के सीमित अधिकारों का जिक्र करते हुए उन्हें ‘हाफ सीएम’ बताया और भाजपा से महिला प्रतिनिधित्व पर जवाब माँगा।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर महिला आरक्षण को लटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने 2023 में विपक्ष की बात मानी होती, तो यह कानून 2024 के चुनाव में ही लागू हो गया होता। गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण को परिसीमन (Delimitation) से जोड़कर इसे और जटिल बना रही है। उन्होंने इसे ‘चोर दरवाजे’ से परिसीमन लागू करने की एक साजिश करार दिया और मांग की कि आरक्षण को बिना किसी शर्त के तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए।
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्य और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। तेजस्वी सूर्य ने कहा कि पिछले 30-40 वर्षों से जो बिल अटका हुआ था, उसे प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इच्छाशक्ति से पारित करवाया है। कानून मंत्री मेघवाल ने कहा कि आज का दिन इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2026 के बाद जनगणना और परिसीमन के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 815 हो जाएगी, जिसमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि किसी भी राज्य को सीटों का नुकसान न हो।
विधेयक पेश करने के दौरान सदन में वोटिंग की स्थिति बनी। संविधान संशोधन बिल के पक्ष में 251 और विपक्ष में 185 वोट पड़े। वोटिंग के दौरान विपक्षी सदस्यों ने भारी शोर-शराबा किया। अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे केवल विरोध की मंशा से आए हैं और बिल की मेरिट पर चर्चा करने के बजाय तकनीकी आपत्तियां उठा रहे हैं।
बहस के दौरान जब मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण और जाति जनगणना का मुद्दा उठा, तो अमित शाह ने स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना पूरी तरह से ‘असंवैधानिक’ है। उन्होंने अखिलेश यादव को जवाब देते हुए कहा कि जनगणना की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और सरकार जातिगत आंकड़ों के साथ गणना करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे चाहें तो अपनी सारी सीटें मुस्लिम उम्मीदवारों को दे सकते हैं, सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
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