ताज़ा खबर

Bihar SIR: वोटर लिस्ट में बदलाव चुनाव आयोग का विशेषाधिकार, सुप्रीम कोर्ट में EC ने दायर किया हलफनामा

Bihar SIR :  चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में एक अहम हलफनामा दायर करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि देशभर में मतदाता सूची (Voter List) में संशोधन और विशेष इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराना उसका संवैधानिक विशेषाधिकार है। आयोग ने कहा कि यदि अदालत इस प्रक्रिया में निर्देश देगी, तो यह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोग के अधिकार में अनुचित हस्तक्षेप होगा।

यह हलफनामा वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की उस याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है, जिसमें मांग की गई थी कि चुनाव आयोग को देशभर में, विशेष रूप से चुनावों से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराने का निर्देश दिया जाए ताकि भारत की राजनीति और नीति केवल भारतीय नागरिकों द्वारा तय की जा सके।

EC ने कहा – वोटर लिस्ट में सुधार हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह मतदाता सूची को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए लगातार काम करता है। आयोग ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में समय-समय पर बदलाव और समरी/इंटेंसिव रिवीजन करना उसकी कानूनी और संवैधानिक जिम्मेदारी है, जिसमें किसी अन्य संस्था या अदालत का हस्तक्षेप अवांछनीय होगा।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत आयोग को यह पूर्ण स्वतंत्रता है कि वह कब और कैसे SIR या समरी रिवीजन कराए।

आयोग ने राज्यों को दिए निर्देश

चुनाव आयोग ने 5 जुलाई 2025 को बिहार को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEOs) को पत्र भेजकर 1 जनवरी 2026 को आधार मानते हुए SIR की तैयारियां शुरू करने का निर्देश दिया था। यह कदम मतदाता सूची को और अधिक सटीक और अद्यतन रखने की दिशा में उठाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: आधार पहचान का प्रमाण, नागरिकता नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को बिहार में जारी SIR प्रक्रिया पर सुनवाई करते हुए कहा कि आधार कार्ड को पहचान के प्रमाण के तौर पर अनिवार्य रूप से स्वीकार किया जाए। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के समय आधार की सत्यता की जांच कर सकता है, ताकि फर्जी नामों को सूची में शामिल होने से रोका जा सके।

आयोग की स्वायत्तता बनी रहे

इस पूरे मामले से साफ है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची से जुड़ी हर प्रक्रिया में पूरी तरह सक्षम और स्वतंत्र संस्था है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए यह संदेश दिया है कि चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए EC की स्वतंत्रता आवश्यक है।

Read More: Arsenal vs Nottm forest: आर्टेटा ने एबरे इजे और क्रिस्टियन मोस्क्वेरा को दिलाया होम डेब्यू, राया का 100वां मुकाबला

Thetarget365

Share
Published by
Thetarget365

Recent Posts

Akshaya Tritiya 2026 : “किस्मत बदलने वाला महासंयोग”, अक्षय तृतीया पर करें ये उपाय, घर में कभी नहीं होगी धन की कमी!

भारतीय काल गणना और हिंदू धर्मग्रंथों में अक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है।…

2 hours ago

World War Alert: “ईरान के बाद अब क्यूबा”, ट्रंप की नई चेतावनी ने हिलाया लैटिन अमेरिका, क्या होगा अगला कदम?

World War Alert: "वैश्विक राजनीति में अपनी आक्रामक शैली के लिए पहचाने जाने वाले अमेरिकी…

2 hours ago

Tech Report: “वीवो का कब्जा, नथिंग की रफ्तार”, भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में बड़ा उलटफेर, देखें टॉप ब्रांड्स की लिस्ट!

Tech Report:  भारतीय स्मार्टफोन बाजार, जो पिछले कई वर्षों से लगातार विकास की राह पर…

2 hours ago

This website uses cookies.