Bilaspur Kidnapping : बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र में रहने वाले एक प्रॉपर्टी डीलर के पांच साल के बेटे का अपहरण हो गया, जिसमें चौंकाने वाली बात यह रही कि बच्चे को उसकी ही मां ने लेकर भागी। घटना के तुरंत बाद पुलिस सक्रिय हो गई और सीसीटीवी फुटेज तथा पूछताछ के आधार पर मामले की तहकीकात शुरू की। दो दिन की कड़ी जांच के बाद पुलिस ने बच्चे को उसकी मां से छुड़ाकर पिता को सौंप दिया है। अब बच्चे का न्यायालय में बयान दर्ज कराकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

घटना का पूरा विवरण
सरकंडा थाने के टीआई निलेश पांडेय ने बताया कि सरकंडा क्षेत्र में रहने वाला 32 वर्षीय प्रॉपर्टी डीलर अपने परिवार में चल रहे विवाद के कारण पत्नी से अलग रह रहा था। पत्नी ने बेटे को पति के पास छोड़कर अलग रहना शुरू कर दिया था। बच्चे की देखभाल के लिए पति ने एक केयर टेकर महिला नियुक्त की थी, जो सोमवार को बच्चे के साथ घर पर थी।

घटना के दिन एक महिला घर पहुंची और प्यास बताकर पानी मांगने लगी। जैसे ही केयर टेकर पानी लेने के लिए किचन गई, उस महिला ने अकेले पड़े बच्चे को अपने गोद में उठाकर घर से भाग लिया। बच्चे के अचानक गायब होने पर परिवार में अफरातफरी मच गई। पिता ने तुरंत केयर टेकर से पूछताछ की, जिसमें महिला द्वारा बच्चे को ले जाने की बात सामने आई। पुलिस को बच्चे के अपहरण की सूचना मिलते ही उन्होंने मामला दर्ज कर तलाश शुरू कर दी।
पुलिस की जांच में मां पर हुआ शक
प्राथमिक जांच में पुलिस को बच्चे की मां पर संदेह हुआ। पुलिस ने मंगला क्षेत्र में मां के ठिकाने की सूचना जुटाई और मंगलवार को पुलिस टीम ने बच्चे के साथ मां को दबोच लिया। पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित पिता के सुपुर्द कर दिया है। बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब उसका बयान न्यायालय में दर्ज कराया जाएगा।
आगे की कार्रवाई
सरकंडा टीआई ने बताया कि बच्चे का बयान दर्ज होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला पारिवारिक विवाद की गंभीरता को दर्शाता है, जिसमें बच्चे की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। पुलिस ने पूरे मामले में संवेदनशीलता बरतते हुए बच्चे की भलाई को प्राथमिकता दी है।
सरकंडा क्षेत्र में हुए इस मामले ने यह दिखाया है कि परिवार के भीतर चल रहे विवाद बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सतर्कता ने बच्चे को सुरक्षित पिता के पास वापस पहुंचाने में मदद की। स्थानीय प्रशासन और पुलिस का उद्देश्य ऐसे मामलों में जल्द से जल्द हस्तक्षेप कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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