Trains Cancelled
Trains Cancelled : छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए बिलासपुर रेलवे जोन से एक बेहद निराशाजनक खबर सामने आई है। रेलवे प्रशासन ने अपनी अनिश्चित कार्यप्रणाली का प्रदर्शन करते हुए उन ट्रेनों को दोबारा रद्द कर दिया है, जिन्हें महज 24 घंटे पहले यात्रियों की सुविधा के नाम पर बहाल (Restore) किया गया था। भीषण गर्मी के इस मौसम में अचानक लिए गए इस फैसले ने हजारों यात्रियों के सफर को मुश्किल बना दिया है।
बिलासपुर रेलवे जोन ने शुक्रवार को एक नया आदेश जारी कर यात्रियों को बड़ा झटका दिया। गौरतलब है कि रेलवे ने पहले कुछ ट्रेनों को रद्द करने की घोषणा की थी, लेकिन भीषण गर्मी और यात्रियों की भीड़ को देखते हुए एक दिन पहले ही उन्हें रिस्टोर करने का निर्णय लिया था। हालांकि, यह राहत अल्पकालिक साबित हुई। दूसरे ही दिन रेलवे ने अपने फैसले को पलटते हुए 10 महत्वपूर्ण ट्रेनों को फिर से कैंसिल कर दिया। रेलवे की इस ‘पलटमार’ नीति के कारण यात्रियों को अपनी पूर्व निर्धारित यात्रा रद्द करनी पड़ रही है, जबकि रेलवे ने इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं कराई है।
रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस निरस्तीकरण के पीछे का मुख्य कारण बुनियादी ढांचे में सुधार है। बिलासपुर और झारसुगड़ा के बीच बिछाई जा रही चौथी रेलवे लाइन को अकलतरा रेलवे स्टेशन से जोड़ने का कार्य किया जाना है। यह ‘नॉन-इंटरलॉकिंग’ कार्य 11 अप्रैल से शुरू होकर 18 अप्रैल तक चलेगा। तकनीकी अनिवार्यताओं के चलते बिलासपुर से रायगढ़, गेवरा रोड और कोरबा से रायपुर के बीच चलने वाली 10 लोकल और मेमू (MEMU) ट्रेनों को शनिवार से अगले एक सप्ताह के लिए रद्द कर दिया गया है।
इस निर्माण कार्य की वजह से कुल 14 ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। रेलवे ने कुछ ट्रेनों के परिचालन में बदलाव भी किया है। कोरबा और रायपुर के मध्य चलने वाली लोकप्रिय हसदेव एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 18250/18249 और 18252/18251) को 11 से 18 अप्रैल तक कोरबा से बिलासपुर के बीच ‘पैसेंजर’ बनाकर चलाया जाएगा। हालांकि, बिलासपुर से रायपुर के बीच यह ट्रेन अपने निर्धारित एक्सप्रेस समय और ठहराव के अनुसार चलेगी। इसके अलावा, गोंदिया-झारसुगड़ा-गोंदिया जेडी पैसेंजर को भी शॉर्ट-टर्मिनेट किया गया है, यानी यह ट्रेन अपने गंतव्य तक न जाकर आधे रास्ते से ही वापस लौटेगी।
अकलतरा स्टेशन को चौथी लाइन से जोड़ने का यह काम पहले 3 से 10 अप्रैल के बीच प्रस्तावित था। उस समय भी ट्रेनों को रद्द किया गया था, लेकिन बाद में रेलवे ने कार्य को टालते हुए सभी ट्रेनों को बहाल कर दिया था। अब अचानक नई तारीखें (11-18 अप्रैल) तय कर दी गई हैं। रेलवे के इस तरह बार-बार फैसले बदलने से यात्रियों में असमंजस की स्थिति है। विशेषकर दैनिक यात्री और मध्यम वर्गीय परिवार, जो लोकल ट्रेनों पर निर्भर हैं, उन्हें इस चिलचिलाती धूप में निजी वाहनों या बसों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो आर्थिक बोझ भी बढ़ा रहा है।
भीषण गर्मी और ‘हीट वेव’ के बीच ट्रेनों का रद्द होना यात्रियों के लिए किसी दोहरी मार से कम नहीं है। बिलासपुर जोन के इस निर्णय से उन मजदूरों और छोटे व्यापारियों को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है जो रोजाना कोरबा, रायगढ़ और बिलासपुर के बीच सफर करते हैं। रेलवे ने विकास कार्य की महत्ता तो बताई है, लेकिन इस दौरान यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए अतिरिक्त बसें या विशेष ट्रेनों जैसे विकल्पों पर चुप्पी साध रखी है।
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