BJP Leader Extortion: मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता की शर्मनाक करतूत सामने आई है। रेप केस में फंसाने की धमकी देकर 30 हजार रुपए की वसूली करते हुए भाजपा नेता छुट्टू महाराज उर्फ बृजेंद्र दुबे को पुलिस ने जय श्रीराम ट्रैवल्स ऑफिस से रंगे हाथ गिरफ्तार किया, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी को चंद घंटों में ही थाने से छोड़ दिया गया।

वसूली के लिए रची गई थी ‘रेप केस’ की साजिश
शिकायतकर्ता राजेश जैन (निवासी धनारे कॉलोनी) ने पुलिस को बताया कि उसे भाजपा नेता छुट्टू महाराज ने अपने ट्रैवल्स ऑफिस बुलाया। वहां मौजूद संदीप राजपूत और पूना बाई चौधरी के साथ मिलकर उसे धमकाया गया कि उसके खिलाफ महिला थाने में रेप का केस दर्ज है, जिससे बचने के लिए 2 लाख रुपए देने होंगे।
राजेश ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस और अधिवक्ता संघ को दी। एक विशेष पुलिस टीम ने योजना बनाकर छुट्टू महाराज को 30 हजार रुपए लेते समय रंगे हाथों पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद मिली ‘रिहाई’, धमकाने फिर पहुंचा आरोपी
पुलिस ने भाजपा नेता को गिरफ्तार तो किया, लेकिन रात में ही थाने से छोड़ दिया गया। इसके बाद अगले ही दिन छुट्टू महाराज ने पीड़ित के घर जाकर शिकायत वापस लेने की धमकी दी। इस पर राजेश जैन ने पुनः एसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई और अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है।
स्टेशनगंज थाना प्रभारी रत्नाकर हिंग्वे ने बताया कि छुट्टू उर्फ बृजेंद्र, संदीप राजपूत और पूना बाई के खिलाफ BNS की धारा 308(2) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू, कांग्रेस का हमला
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर आरोपी भाजपा नेता का गिरफ्तारी वीडियो शेयर करते हुए लिखा:“मध्यप्रदेश में भाजपाई जो न करें, वही कम है। हर गोरखधंधे में कहीं न कहीं कोई भाजपाई सामने आ जाता है। नेताओं ने वसूली को हथियार बना लिया है।”
कांग्रेस का आरोप है कि सत्ता के संरक्षण में भाजपा नेता आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हैं और पुलिस पर दबाव बनाकर रिहाई सुनिश्चित कराई जा रही है।नरसिंहपुर में भाजपा नेता द्वारा फर्जी रेप केस की धमकी देकर वसूली करने का मामला गंभीर सवाल खड़े करता है। पीड़ित को अब न्याय और सुरक्षा दोनों की तलाश है, जबकि आरोपी खुलेआम घूम रहा है। इस मामले ने मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था और सत्ता संरक्षण को लेकर नई बहस छेड़ दी है।


















