West Bengal Election
West Bengal Election : पश्चिम बंगाल में अंतिम चरण के मतदान से पहले राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है, लेकिन इस बार चर्चा का केंद्र चुनावी वादे नहीं बल्कि हिंसक धमकियाँ और विवादित बयान हैं। उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा, जिन्हें ‘सिंघम’ के नाम से जाना जाता है, को दक्षिण 24 परगना का पुलिस ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए की गई थी, लेकिन उनके काम करने के अंदाज ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में वह एक उम्मीदवार के परिवार को सीधे तौर पर चेतावनी देते नजर आ रहे हैं, जिसकी विपक्षी दलों द्वारा तीखी आलोचना की जा रही है।
सोमवार को वायरल हुए एक वीडियो में अजय पाल शर्मा भारी सुरक्षा बल के साथ फाल्टा से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान के आवास पर पहुंचे। वीडियो में उन्हें सख्त लहजे में परिवार को धमकाते हुए सुना जा सकता है। उन्होंने कहा, “सब लोग कान खोलकर सुन लो, अगर मतदान के दौरान कोई भी गड़बड़ हुई या परेशानी खड़ी की गई, तो मैं बर्दाश्त नहीं करूँगा।” उन्होंने आगे कहा कि वह जहांगीर के परिजनों को स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि यदि उनके समर्थकों ने लोगों को डराया, तो इसका परिणाम बहुत बुरा होगा। “रोने का कोई फायदा नहीं होगा,” की उनकी इस सख्त चेतावनी ने बंगाल की सियासत में उबाल ला दिया है।
भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इस वीडियो को साझा करते हुए पुलिस अधिकारी की मुस्तैदी की तारीफ की। हालांकि, विवाद तब और गहरा गया जब भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में से एक, अजय आलोक ने इस पोस्ट पर टिप्पणी की। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टैग करते हुए लिखा, “लात खाने वाले लोग बातों से नहीं सुनते। वे चुनाव के नतीजे आने तक भागेंगे नहीं। अगर धमकी दोगे तो गोली खानी पड़ेगी, दीदी।” अजय आलोक की इस टिप्पणी को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को जान से मारने की धमकी के रूप में देखा जा रहा है। इस पोस्ट के बाद तृणमूल कांग्रेस ने इसे महिला अस्मिता और लोकतंत्र पर हमला करार दिया है।
भाजपा प्रवक्ता के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी नेता शांतनु सेन ने इसे बंगाल की संस्कृति का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता देश की एक सम्मानित महिला मुख्यमंत्री के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। शांतनु सेन ने याद दिलाया कि ममता बनर्जी सात बार सांसद और तीन बार केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं और राज्य की चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “बंगाल में इस तरह की गुंडागर्दी और धमकियाँ नहीं चलतीं। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से लेकर उनके प्रवक्ता तक केवल अपमान करना जानते हैं, लेकिन जनता इसका करारा जवाब 4 मई को मतगणना के दिन देगी।”
बंगाल चुनाव हमेशा से ही अपनी संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों और राजनीतिक प्रवक्ताओं के बीच का संवाद जिस निचले स्तर पर पहुंचा है, वह चिंताजनक है। एक तरफ जहाँ चुनाव आयोग शांतिपूर्ण मतदान का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ‘गोली’ और ‘लात’ जैसे शब्दों का प्रयोग मतदाताओं के मन में भय पैदा कर रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने अजय आलोक के पोस्ट का स्क्रीनशॉट लेकर चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है। अब सबकी नजरें 4 मई के नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि बंगाल की जनता ने इन विवादों और धमकियों को किस तरह लिया है।
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