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PM आवास योजना में रिश्वत का खुलासा: आवंटित राशि की स्वीकृति के लिए सहायक सचिव ने ली 3000 रुपये की घूस

  • केल्हारी क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घोटाला, सहायक सचिव पर रिश्वत और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप

मनेन्द्रगढ़ @thetarget365 : प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के अंतर्गत केल्हारी क्षेत्र में एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। ग्रामीणों ने सहायक सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उनसे रिश्वत की मांग की गई और कई मामलों में पात्र लोगों को वंचित कर अपात्रों को लाभ पहुंचाया गया।

 

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत के एक निवासी ने बताया कि उसे योजना का लाभ देने के लिए ₹10,000 की मांग की गई थी। जब उसने पैसा देने से इनकार किया, तो उसका नाम सूची से हटा दिया गया। इसके अलावा, ग्रामीणों का आरोप है कि जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं, उन्हें योजना का लाभ मिला, जबकि सच्चे जरूरतमंद आज भी कच्चे मकानों में जीवन गुजार रहे हैं।

यह घोटाला ना केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे जनकल्याणकारी योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं।

 

PM आवास योजना में रिश्वत का खुलासा: आवंटित राशि की स्वीकृति के लिए सहायक सचिव ने ली 3000 रुपये की घूस

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केल्हारी क्षेत्र में एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। योजना के लाभार्थियों ने आरोप लगाया है कि आवंटित राशि को स्वीकृत कराने के एवज में ग्राम पंचायत के सहायक सचिव ने प्रत्येक लाभार्थी से ₹3000 की रिश्वत वसूली।

ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने पीएम आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए आवेदन किया और उनका नाम स्वीकृत सूची में आया, तो सहायक सचिव ने अगली प्रक्रिया में फाइल आगे बढ़ाने और राशि जारी कराने के लिए उनसे 3000-3000 रुपये की मांग की। कई लोगों ने मजबूरी में यह रकम दी, जबकि कुछ ने विरोध भी किया।

एक लाभार्थी ने बताया, “हम गरीब लोग हैं, सरकार से जो मदद मिल रही है उसी से घर बनाना है। ऊपर से अधिकारी पैसे मांग रहे हैं, तो हम कहां जाएं?”

इस खुलासे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है। कई लोगों ने पंचायत में खुलकर आवाज उठाई और जांच की मांग की। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच के आदेश दे दिए हैं। अगर आरोप सही पाए गए, तो सहायक सचिव के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि गरीबों के लिए बनी योजनाएं कैसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं।

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