BRICS Summit 2026 के पहले दिन सदस्य देशों के नेताओं ने परमाणु सुरक्षा और असैन्य बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। भारत की मेजबानी में आयोजित दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA की पूरी निगरानी में संचालित शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर जानबूझकर किए जाने वाले हमलों की कड़ी निंदा की। नेताओं ने कहा कि परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं होनी चाहिए।
सशस्त्र संघर्ष में भी परमाणु सुरक्षा जरूरी
शिखर सम्मेलन के पहले दिन स्वीकार किए गए ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में परमाणु सुरक्षा और संरक्षा को लेकर स्पष्ट रुख सामने आया। घोषणापत्र में कहा गया कि परमाणु सुरक्षा के मानकों को हर परिस्थिति में बनाए रखना जरूरी है। चाहे किसी क्षेत्र में सशस्त्र संघर्ष की स्थिति ही क्यों न हो, परमाणु प्रतिष्ठानों और उनसे जुड़े सुरक्षा उपायों की अनदेखी नहीं की जा सकती। इसका उद्देश्य आम लोगों और पर्यावरण को संभावित नुकसान से बचाना है।
परमाणु खतरे और बढ़ते संघर्ष पर चिंता
ब्रिक्स नेताओं ने दुनिया में बढ़ते परमाणु खतरे और संघर्ष की संभावनाओं को लेकर भी चिंता जाहिर की। नेताओं के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सशस्त्र संघर्षों के बढ़ने से परमाणु सुरक्षा के सामने नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं। ऐसे में परमाणु सुविधाओं को किसी भी सैन्य तनाव का निशाना बनने से रोकना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
पीएम मोदी की मौजूदगी में घोषणापत्र को मिली मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले दिन की बातचीत समाप्त होने के बाद नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाए जाने की घोषणा की। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत ब्रिक्स के कई शीर्ष नेता मौजूद रहे। संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति को शिखर सम्मेलन की अहम उपलब्धियों में माना जा रहा है।
किसी देश का नाम लिए बिना हमलों पर जताई चिंता
नई दिल्ली घोषणापत्र में परमाणु सुविधाओं पर हमलों को लेकर किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया गया। नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून और IAEA के संबंधित प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए नागरिक बुनियादी ढांचे तथा IAEA की सुरक्षा निगरानी में चल रही शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर जानबूझकर किए गए हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई। यह भाषा विभिन्न देशों के बीच मतभेदों के बावजूद साझा सहमति बनाने की कोशिश को दर्शाती है।
लोगों और पर्यावरण की सुरक्षा को प्राथमिकता
घोषणापत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि परमाणु सुरक्षा उपायों को लगातार प्रभावी बनाए रखना जरूरी है। नेताओं ने कहा कि परमाणु दुर्घटना या हमले की स्थिति में आम नागरिकों और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। इसलिए परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को युद्ध और सशस्त्र संघर्ष जैसी परिस्थितियों में भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पश्चिम एशिया विवाद के बीच बनी सहमति
BRICS Summit 2026 के पहले दिन संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति बनना भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर ब्रिक्स देशों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण होने के बावजूद सदस्य देश साझा दस्तावेज पर सहमत हुए। खास तौर पर संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर मतभेदों के बावजूद घोषणापत्र को मंजूरी मिलना महत्वपूर्ण है।
अमेरिका और ईरान के हमलों का सीधा उल्लेख नहीं
घोषणापत्र में पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित भाषा का इस्तेमाल किया गया। इसमें अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों या ईरानी सेना की ओर से खाड़ी के अरब देशों पर किए गए हमलों का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया। इसके बजाय व्यापक तौर पर नागरिक बुनियादी ढांचे और परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा पर जोर दिया गया।
भारत की कूटनीति को मिली बड़ी सफलता
ब्रिक्स देशों को एक साझा घोषणापत्र पर सहमत कराने में भारत की मेजबानी और कूटनीतिक प्रयासों की अहम भूमिका रही। अलग-अलग क्षेत्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद सदस्य देशों ने परमाणु सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर साझा रुख अपनाया। इससे भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका को मजबूती मिलने का संकेत माना जा रहा है।
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