Britain recognizes Palestine: ब्रिटेन जल्द ही फिलिस्तीन को औपचारिक रूप से राष्ट्र के रूप में मान्यता देने वाला है। रविवार को इसके ऐलान की संभावना है, जिसे लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर की तरफ से किया जाएगा। यह फैसला जुलाई में ब्रिटेन सरकार के उस बयान के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि अगर सितंबर तक गाजा में इजराइली सैन्य अभियान और नरसंहार नहीं रुका, तो ब्रिटेन फिलिस्तीन को मान्यता देगा।

कीर स्टार्मर का आह्वान: युद्ध विराम और शांति के लिए कदम
कीर स्टार्मर ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार से गाजा की भयावह स्थिति को समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने युद्ध विराम पर सहमति बनाने, संयुक्त राष्ट्र को सहायता आपूर्ति फिर से शुरू करने की अनुमति देने और वेस्ट बैंक को इजराइल में मिलाने के प्रयासों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। स्टार्मर ने स्थायी शांति के लिए दोनों पक्षों से संयम बरतने को भी कहा है।

इजराइल की प्रतिक्रिया और विरोध
हालांकि, इजराइली विदेश मंत्रालय ने कीर स्टार्मर के बयान को खारिज कर दिया है। नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि स्टार्मर हमास को सम्मानित कर रहे हैं जबकि वे बंधकों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। इस फैसले को लेकर इजराइल में कई दक्षिणपंथी समूह और सरकार विरोध में हैं। उनका मानना है कि फिलिस्तीन को मान्यता देना संघर्ष को और बढ़ावा देगा।
संयुक्त राष्ट्र में शामिल होगा ब्रिटेन
ब्रिटेन के इस कदम के बाद वह उन 147 देशों में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने फिलिस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता दी है। यह निर्णय संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्व लिया जा रहा है, जो सोमवार को न्यूयॉर्क में शुरू हो रही है।
गाजा में जारी स्थिति और युद्ध विराम का अभाव
ब्रिटेन ने इजराइल को सितंबर तक चेतावनी दी थी कि गाजा में नरसंहार बंद किया जाए और युद्ध विराम हो, लेकिन गाजा में हालात बदतर होते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने गाजा में भुखमरी की घोषणा की है और इजराइल ने गाजा शहर पर कब्जा करने के लिए एक बड़ा जमीनी अभियान शुरू कर दिया है। इस हमले की दुनिया भर में निंदा हो रही है। ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर ने इस सैन्य अभियान को ‘बेहद लापरवाही और भयावह’ करार दिया है।
मान्यता के साथ ठोस कदम भी जरूरी
फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, और कनाडा जैसे देशों ने भी इजराइल पर दबाव बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन को मान्यता देने का समर्थन किया है। ब्रिटेन की मुस्लिम काउंसिल ने प्रधानमंत्री के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही यह भी आग्रह किया है कि केवल मान्यता देना पर्याप्त नहीं, बल्कि इसके साथ ठोस राजनीतिक और मानवीय कदम भी उठाए जाने चाहिए।
ब्रिटेन का फिलिस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देने का कदम न केवल क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है, बल्कि यह इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत भी है। हालांकि, इजराइल में इस फैसले का विरोध जारी है और गाजा में स्थिति नाजुक बनी हुई है। अब देखना होगा कि इस मान्यता के बाद ब्रिटेन और अन्य देश कैसे मिलकर शांति स्थापना के लिए ठोस पहल करते हैं।
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